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ना'त-ओ-मनक़बत
तुम्हारी ज़ात है वो पाक ज़ात या-वारिसकि जिस में सब हैं ख़ुदा की सिफ़ात या-वारिस
एजाज़ वारसी
ना'त-ओ-मनक़बत
जज़्ब है ताबिश-ए-नज़र ख़त्म-ए-रुसुल की ज़ात मेंआई जो बन के शम-ए’-हक़ अंजुमन-ए-हयात में
शकील बदायूँनी
दोहा
इंद्रियों का बर्णन - जित जित इन्द्री जात है तित मन कूँ ले जात
जित जित इन्द्री जात है तित मन कूँ ले जातबुधि भी संगहि जात है ये निस्चय करि बात
चरनदास जी
सूफ़ी उद्धरण
ऊँची ज़ात वाला ऊँचा नहीं, सिर्फ अच्छे आमाल वाला ऊँचा है।
ऊँची ज़ात वाला ऊँचा नहीं, सिर्फ अच्छे आमाल वाला ऊँचा है।
तुलसीदास ब्रजवासी
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ना'त-ओ-मनक़बत
मा'बूद है तू ज़ात तेरी लम-यज़ल की है'आबिद तिरा हर एक नबी और वली है
मोहम्मद इब्राहीम सिद्दीक़ी
कुंडलिया
चितावनी - क्या सोवै तू बावरी चाला जात बसंत
क्या सोवै तू बावरी चाला जात बसंतचाला जात बसंत कंत ना घर में आये
पलटू साहेब
दोहा
रहिमन भेषज के किए काल जीति जो जात
रहिमन भेषज के किए काल जीति जो जातबड़े बड़े समरथ भए तौ न कोउ मरि जात
रहीम
दोहा
रहिमन याचकता गहे बड़े छोट ह्वै जात
रहिमन याचकता गहे बड़े छोट ह्वै जातनारायण हू को भयो बावन आँगुर गात
रहीम
राग आधारित पद
मोरा निकसो जात प्राण गोसय्याँ
मोरा निकसो जात प्राण गोसय्याँकोने जतन अब मिलेंगे सय्याँ
कौसर ख़ैराबादी
दोहरा
बयस अकारथ जात है कहत 'अशरफ़ी' रोय
बयस अकारथ जात है कहत 'अशरफ़ी' रोयबोया बीज बबूल का आम कहाँ से होय
अली हुसैन अशरफ़ी
अरिल्ल
अरिल छंद - दुनिया बिच हैरान जात नर धावई
दुनिया बिच हैरान जात नर धावईचीन्हत नाहीं नाम भरम मन लावई
गुलाल साहब
पद
ककहरा - चच्चा चले जात नर भूल सूल ता से सहै
चच्चा चले जात नर भूल सूल ता से सहैसतसंग मिलै न अंत संत बिन को कहै
तुलसी साहिब हाथरस वाले
राग आधारित पद
उपालंभ - अरी हम जात रहीं डगरी-डगरी
अरी हम जात रहीं डगरी-डगरी यहि गगरी सीस धरैं मगरीहमहिं देख दौरौ एकटक गोरी अनैंट कीनीं सगरी
तानसेन
दोहा
विनय मलिका - मलयागिर के निकट हीं सब चंदन हो जात
मलयागिर के निकट हीं सब चंदन हो जातछूटै करम कुबासना महा सुगंध महकात
दया बाई
कुंडलिया
छाती बजरंग भई काहे तरकि न जात
छाती बजरंग भई काहे तरकि न जातसावन मास बिदेस पीव बहत कटारी गात
वाजिद जी दादूपंथी
शबद
उपदेश का अंग - तुम जात न जान गँवारा हो
तुम जात न जान गँवारा होको तुम आहु कहाँ तें आयो झूठो करत पसारा हो
गुलाल साहब
अरिल्ल
जन्म जात है बादि याद कर पीव कूँ
जन्म जात है बादि याद कर पीव कूँमुश्किल सब आसान होई है जीव कूँ