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ना'त-ओ-मनक़बत
दीन-ए-अहमद का 'अली हैं वो चमकता आफ़ताबजिन की 'अज़्मत और रंगत और ज़िया कुछ और है
महमूद अहमद रब्बानी
ना'त-ओ-मनक़बत
'अहमद' तू ब-सद शौक़ लुटा अहल-ए-अदब मेंतौसीफ़ पयम्बर के गुहर और ज़्यादा
तुफ़ैल अहमद मिस्बाही
ना'त-ओ-मनक़बत
दोश-ए-अहमद पर 'अली का'बे के अंदर देखिएये ख़ुदा के घर के अंदर मो'जिज़ा कुछ और है
रियाज़ अहमद
ग़ज़ल
सरज़मीन-ए-चिश्त की आब-ओ-हवा कुछ और हैदीन-ओ-दुनिया से निराला और ही कुछ तौर है
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
ना'त-ओ-मनक़बत
जो 'अली से बुग़्ज़ रक्खे उस की ये पहचान हैसोचता कुछ और है और बोलता कुछ और है
मक़बूल अहमद अंसारी
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दोहा
अबि-बकर और उमर पुन उस्मान अ'ली बखान
अबि-बकर और उमर पुन उस्मान अ'ली बखानसत नेति और लाज अती बिद्या बूझ सुजान
बरकतुल्लाह पेमी
ग़ज़ल
हम ग़म-ज़दों की मौत क्या और क्या हमारी ज़िंदगीबस हिज्र की शब मौत है और वस्ल के दिन ज़िंदगी
बेदम शाह वारसी
कलाम
नीस्ती हस्ती है यारो और हस्ती कुछ नहींबे-ख़ुदी मस्ती है यारो और मस्ती कुछ नहीं
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
शे'र
नीस्ती हस्ती है यारो और हस्ती कुछ नहींबे-ख़ुदी मस्ती है यारो और मस्ती कुछ नहीं
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
सूफ़ी लेख
शाह तुराब अली क़लंदर और उनका काव्य
सूफ़ी-संतों के योगदान को अगर एक वाक्य में लिखना हो तो हम कह सकते हैं कि
सुमन मिश्र
चादर
हक़ ने अहमद को मुज़म्मिल की अढ़ाई चादर'इत्र-ए-क़ुर्बत से है क्या ख़ूब बसाई चादर
तसद्दुक़ अ’ली असद
कलाम
रहम है जिस के सितम में वो सितम-गर और हैहै वफ़ा जिस की जफ़ा में वो जफ़ा गर और है
तसद्दुक़ अ’ली असद
कलाम
ऐ यार न मुझ से मुँह को छुपा तू और नहीं मैं और नहींहै शक्ल तेरी मेरा नक़्शा तू और नहीं मैं और नहीं
इम्दाद अ'ली उ'ल्वी
कलाम
ख़ुद अदा मरती है जिस पर वो अदा कुछ और हैहै वफ़ा भी जिस पे सदक़े वो जफ़ा कुछ और है
तसद्दुक़ अ’ली असद
शे'र
ख़ुद अदा मरती है जिस पर वो अदा कुछ और हैहै वफ़ा भी जिस पे सदक़े वो जफ़ा कुछ और है