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शे'र
तुम अपनी ज़ुल्फ़ खोलो फिर दिल-ए-पुर-दाग़ चमकेगाअंधेरा हो तो कुछ कुछ शम्अ' की आँखों में नूर आए
मुज़तर ख़ैराबादी
पद
दिल की गाँठ खोलो यारो नाम बोलो
दिल की गाँठ खोलो यारो नाम बोलोकुइ नहीं आव सात मुंडे काय कू करे बात
एकनाथ
दकनी सूफ़ी काव्य
दिल की गाठ खोलो यारो नाम बोलो
दिल की गाठ खोलो यारो नाम बोलोकोई नई आवे सात मुंडे काए कू करे बात
एकनाथ
ना'त-ओ-मनक़बत
ताज-ए-शफ़ा'अत सर पर पहने हश्र का दूल्हा आ पहुँचा हैआँखें खोलो ग़ौर से देखो किस की है बारात न पूछो
ख़ालिद महमूद नक़्शबंदी
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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ दिल म-बाश ख़ाली यक-दम ज़े-इश्क़-ओ-मस्तीवाँगह ब-रौ कि रस्ती अज़ नेस्ती-ओ-हस्ती
हाफ़िज़
शे'र
चु नै ख़ाली शुदम अज़ आरज़ूहा लैक इ'श्क़-ए-ऊब-गोशम मी-दमद हर्फ़े कि मन नाचार मी-नालम
ख़्वाजा मीर दर्द
फ़ारसी कलाम
न-बाशद ख़ाली अज़ तू हेच-बज़्म-ओ-हेच-मय-ख़ानःज़े-तुस्त आबादी-ए-आ'लम-जहाँ बे-तुस्त वीरानः
शाह तुराब अली क़लंदर
ना'त-ओ-मनक़बत
मख़दूम ख़ादिम सफ़ी
शबद
भली खेली करौ देवा भली खेली अचंभव बानी
भली खेली करौ देवा भली खेली अचंभव बानीअकथ कथेली तुम्हें अगम गमेली हमें हेइ तंत देसै बखानी