आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mafar"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "mafar"
अन्य परिणाम "mafar"
ग़ज़ल
निशान-ए-मंज़िल-ए-मक़्सूद से आगाह थे 'वासिफ़'फ़रेब-ए-आगही से कब मफ़र है हम न कहते थे
वासिफ़ अली वासिफ़
कलाम
इस दिल-ए-ज़ार से मफ़र 'इश्क़ में जीते जी नहींरोना है मुझ को 'उम्र-भर ग़म मिरा ’आरज़ी नहीं
ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
कलाम
आतिश-ए-ज़ब्त से मफ़र यूँ तो फ़ुग़ाँ में है मगरहाए वो ना-तवाँ जिसे हौसला-ए-फ़ुग़ाँ न हो
शकील बदायूँनी
ग़ज़ल
‘नख़शब’-ए-सादा लौह कब हुस्न से कोई बच सकेहिस न हो जिस के क़ल्ब में उस के लिए मफ़र भी है