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सूफ़ी कहावत
गरत अज़ दस्त बर आयद, दहनी शीरीं कुन,,मर्दी आं नीस्त कि मुश्ती बज़नी बर दहनी
अगर आपसे संभव हो, तो किसी के मुँह को मीठा कीजिए; किसी के मुँह पर मारना मर्दानगी की निशानी नहीं है