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ग़ज़ल
ऐ माह-ए-ख़ुश-रू कह दे अब जो बात हैकि पैमाना-ए-तजस्सुसस-ए-मन मुंतज़िर-ए-ब-इल्तिफ़ात है
अहमद अब्दुल रहमान
ग़ज़ल
कभी पूछा न ऐ साजन जो क्या तुझ पर गुज़रती हैतेरी फ़ुर्क़त से ऐ प्यारे न जीती है न मरती है
मीराँ शाह जालंधरी
ना'त-ओ-मनक़बत
तोरी हर हर अदा को मैं जान गई नाँमेरा दिल क्या गया मेरी जान गई नाँ
क़ाज़ी इमादुद्दीन सिद्दीक़ी
कलाम
ताबिश कानपुरी
ना'त-ओ-मनक़बत
ऐ ख़ुशा वो आँख जो दिन-रात देखे रू-ए-शैख़दिल वही दिल है जो हो आशुफ़्ता-ए-गेसू-ए-शैख़
फ़रीद इमादी
ना'त-ओ-मनक़बत
दर-ए-ख़्वाजा पे ऐ ज़ाहिद जो सज्दा कर रहा हूँ मैंवो सज्दा मा-वरा-ए-होश है ये जानता हूँ मैं
ख़्वाजा नाज़िर निज़ामी
कलाम
जो दम ग़ाफ़िल सो दम काफ़िर मुर्शिद एह पढ़ाया हूसुणया सुख़न गइयाँ खुल अक्खीं चित्त मौला वल लाया हू
सुल्तान बाहू
ग़ज़ल
चराग़-ए-जहाँ में ऐ गुल जो कुछ कि है सो तू हैशम्साद-ओ-सर्व-ए-सुंबुल जो कुछ कि है सो तू है

