Sufinama
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चरनदास जी

1703 - 1839 | मेवाड़, इंडिया

दोहा 36

गुरू के आगे जाय करि ऐसे बोलै बोल

कछू कपट राखै नहीं अरज करै मन खोल

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जब सतगुरू किरपा करैं खोलि दिखावैं नैन

जग झूठा दीखन लगै देह परे की सैन

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दया होय गुरूदेव की भजै मान अरू मैन

भोग वासना सब छुटै पावै अति ही चैन

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दृष्टि पड़ै गुरूदेव की देखत करें निहाल

औरैं मति पलटैं तवै कागा होत मराल

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सतगुरू शब्दी सेल है सहै धमूका साध

कायर ऊपर जो चलै तौ जावै बर्बाद

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चौपाई 2

 

राग आधारित पद 3

 

अष्टपदी 4

 

"मेवाड़" के और शायर

  • दया बाई दया बाई