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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
आईनःअम आईनःअम ता-कि ब-दीदम रू-ए-चु माहशचश्म-ए-जहानम चश्म-ए-जहानम ताकि ब-दीदम चश्म-ए-स्याहश
रूमी
राग आधारित पद
राग कान्हरा- शट तज नाव जगत सँग राचो
शट तज नाव जगत सँग राचोजिहि करण बहुस्वांग कछे हैं
सहजो बाई
ना'त-ओ-मनक़बत
अज्ञात
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साखी
अथ भेंट का अंग - सांई लग सेवा रची टरया न अपनी टेक
सांई लग सेवा रची टरया न अपनी टेकदादू सम नहिं दूसरा दीरध दास सु एक
रज्जब
दोहा
चित्र चतेरा जो करै रचि पचि सूरत बाल
चित्र चतेरा जो करै रचि पचि सूरत बालवो चितवनि वो मुर चलँन क्यूँकर लखै 'जमाल'
जमाल
शबद
ना जानों प्रभु का धौ रंग रचो री
ना जानों प्रभु का धौ रंग रचो रीना जानों प्रभु का धौ रंग रचो री
भीखा साहेब
होली
रंग राचो बसंत नई रुत हज़रत नबी रसूल कीहर हरी रंग हसन की हरली लाल लाल कलियाँ हुसैन की लाली
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
होली
ऐसी होरी कौन रचो री जा की धूम मची चहूँ ओरीकरत पिचकारी निरत सुरत की पेम रस के रंग बहुरौ री
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
ना'त-ओ-मनक़बत
जगमगाते हैं उसी से मिरे बातिन के नुक़ूशजल्वा-ए-हुस्न-ए-अज़ल ऐसा रचा नैन में है
ग़ुलाम क़ुतुबुद्दीन फ़रीदी
पद
ककहरा - यय्या या को चीन्ह बिचार कहो ये कौन है
धरती अगिनि अकास नीर कोउ को न थाअरे हाँ रे तुलसी रचा नहीं बैराट बोलता कहँ हता
तुलसी साहिब हाथरस वाले
ना'त-ओ-मनक़बत
हर जुम्बिश-ए-लब पर तेरा ज़िक्र रहे हर दमतू सुब्ह-ए-सुख़न मेरी तू मुझ में रचा जाना
सय्यद अमजद हुसैन
पद
काहे को 'दिलदार' फिरे है घर घर तू दिन राता
सोच नहीं करता है दिल में क्या कुछ पी के माताजो बिधना ने रचा सो होगा फिर क्यूँ रंज उठाता
कवि दिलदार
ना'त-ओ-मनक़बत
बज़्म-ए-कुन में खेल उल्फ़त का रचा कर ख़ुद बना'इश्क़ का बे-ताब दिल और हुस्न का ऊँचा दिमाग़
अब्दुल हादी काविश
ग़ज़ल
सब सखियों ने फाग मनाया घर घर प्रेम का रास रचामेरे घर में गीत न आए और न कभी पायल छनकी