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शैख़ फ़रीदी गंज जिनकी रजाकार पाइयत हैन्यामत मौज मन की मुराद भरत वर
शैख़ फ़रीद आलमगीर गंज-बकस सरगंजनाम ऐसैं कै लीजै निवाज रहै जग में लाज जाय तन तैं रंज
आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करना और कोई ऊँचा दर्जा हासिल करना आसान हो सकता है लेकिन किसी सच्चे पीर से गहरी निस्बत बनाना और निभाना सबसे कठिन है।
आईना-ए-ज़मीर ख़्वाजा-ए-अल्लाह बख़्शथे शैख़-ए-कबीर ख़्वाजा-ए-अल्लाह बख़्श
यारब दोई के फ़िक्र से मुझ को फ़राग़ बख़्शवहदत के मय-कदे से लबाब-ए-अयाग़ बख़्श
किसी सच्चे निस्बत वाले पीर से मुरीद होना नजात का कारण बनता है। क़यामत के दिन जब उस पीर पर ख़ुदा की इनायत होगी, तो उसकी रूहानी रोशनी का असर उसके मुरीदों तक भी पहुँचेगा और वे सभी उसके साथ जन्नत में प्रवेश करेंगे।"
ख़ुदा ने ख़ुद अ'ता की है मेरे मख़दूम की चादरमैं सदक़े मुस्तफ़ा की है मेरे मख़दूम की चादर
भर सूरत कि बन आवे दोई साजन सही करनासिदक़ सेती आगे असदे अदब के हाल में रहना
कुजाई गंज-ए-पिन्हानी कुजाईब-मा'मूरी ब-वीरानी कुजाई
ऐसी सूरत दिखाईश्याम मोरे मत बौराई
या रब ज़ करम ब-बख़्श तक़्सीर मरामक़्बूल ब-कुन नाल:-ए-शब-गीर मरा
गंज-ए-क़ारूँ को करें ख़ाक-बराबर न शुमारआशिक़ों के लिए इक्सीर है ख़ाक-ए-दयार
जब गंज-ए-ख़फ़ी से नूर-ए-मख़्फ़ी निकलाअल्लाह ने नाम उस का मोहम्मद रखा
हमारे यार की सूरत जहाँ देखो 'अयाँ देखोये सब जल्वा ख़ुदाई का मियाँ देखो जहाँ देखो
बिरज के मोहन मोहीं सूरत दिखाईसूरत दिखाए मोरी सुधा बिसराई
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