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ना'त-ओ-मनक़बत
तमाम उ'म्र क़ियाम-ओ-सुजूद में गुज़रीथे एक आ’बिद-ए-शब ज़िंदा-दार-ए-तेग़-ए-अ’ली
वासिफ़ रज़ा वासिफ़
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नज़्म
कारवान-ए-हयात
मौत क्या है हक़ से बंदे को मिलाने का सबबमौत से डरते नहीं जो जागते हैं नीम-शब
वासिफ़ अली वासिफ़
नज़्म
ख़्वाजा-जी
ख़्वाजा मिरे का राज़ निराला ख़्वाजा मिले तो रैन उजालादरस बना जग घोर अंधेरा दिन अपने भी रातें हैं
वासिफ़ अली वासिफ़
नज़्म
मीलाद-उन-नबी
मुबारक हो कि दुनिया में शह-ए-दुनिया-ओ-दीं आएचराग़-ए-तूर आए ज़ीनत-ए-अर्श-ए-बरीं आए
वासिफ़ अली वासिफ़
सूफ़ी उद्धरण
बुद्धिमान व्यक्ति से परिचय आदमी को बुद्धिमान बना देता है।
बुद्धिमान व्यक्ति से परिचय आदमी को बुद्धिमान बना देता है।
वासिफ़ अली वासिफ़
कलाम
मैं शम-ए-फ़रोज़ाँ हूँ मैं आतिश-ए-लर्ज़ां हूँमैं सोज़िश-ए-हिज्राँ हूँ मैं मंज़िल-ए-परवानः
वासिफ़ अली वासिफ़
सूफ़ी उद्धरण
लोग दोस्त को छोड़ देते हैं बहस को नहीं छोड़ते।
लोग दोस्त को छोड़ देते हैं बहस को नहीं छोड़ते।
वासिफ़ अली वासिफ़
सूफ़ी उद्धरण
तौबा के बा’द गुनाह की याद भी गुनाह है।
तौबा के बा’द गुनाह की याद भी गुनाह है।