आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "tiin"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "tiin"
सोरठा
तीन ग्रन्थि निरुपण तीन ग्रन्थि को भेद कहिये गुरु समझाय कै
तीन ग्रन्थि निरुपण तीन ग्रन्थि को भेद कहिये गुरु समझाय कैतुम मुख वांणी वेद ज्यूँ को त्यूँ समझाइए
स्वामी भगवानदास जी
राग आधारित पद
रागिनी पूर्वी चौताल - मुरली बजावौ रिझावै मनमोहन मधुर-मधुर स्वर तान
मुरली बजावौ रिझावै मनमोहन मधुर-मधुर स्वर तानसप्त तीन इकईस बाईसौ लाग-डाट और मान
तानसेन
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
पुस्तकें के संबंधित परिणाम "tiin"
अन्य परिणाम "tiin"
अष्टपदी
ज्ञान मति वर्णन - तन मथने को जतन कहूँ अब जानिये
दहिनी ओर सों तीन लपेटे दीजियेतीजे चक्कर माहिं गमन फिर कीजिये
चरनदास जी
राग आधारित पद
राग भैरव चौताल - आ गुनी सोध सप्त स्वर तीन ग्राम
आ गुनी सोध सप्त स्वर तीन ग्रामउरप तिरप लाग डाट भेस
तानसेन
शबद
ये मन सकती ये मन सीव ये मन तीन भुवन का जीव
ये मन सकती ये मन सीव ये मन तीन भुवन का जीवये मन लै जो उन्मनि रहै तीन भुवन का बातैं कहै
अब्दुल क़ुद्दूस गंगोही
दोहा
रहिमन तीन प्रकार ते हित अनहित पहिचानि
रहिमन तीन प्रकार ते हित अनहित पहिचानिपर बस परे परोस बस परे मामिला जानि
रहीम
दोहा
विनय मलिका - तीन लोक में हे प्रभू तुम हीं करो सो होय
तीन लोक में हे प्रभू तुम हीं करो सो होयसुर नर मुनि गंधर्ब जे मेटि सकैं नहिं कोय
दया बाई
दोहा
अर्थ धर्म अरु काम पुनि त्याग पदारथ तीन
अर्थ धर्म अरु काम पुनि त्याग पदारथ तीनसो अधिकारी मोक्ष को महाज्ञान परवीन
स्वामी भगवानदास जी
राग आधारित पद
रागिनी भीमपलासी चौताल - ऐ ही सप्त सुर तीन ग्राम इकईस मूर्छना
ऐ ही सप्त सुर तीन ग्राम इकईस मूर्छनागीत छंद धोवा माठा प्रबंध त्रेवट तान
तानसेन
पद
तूँ आदि भवानी जग जानी सर्बानी सर्ब कला दे विद्या बरदानी
शुद्ध राग रंग अक्षर दे बानीसप्त स्वर तीन ग्राम इकइस मुरछना उनचास कोट तान
बैजू बावरा
दोहा
बैराग का अंग - तीन लोक नौ खंड के लिए जीव सब हेर
तीन लोक नौ खंड के लिए जीव सब हेर'दया' काल प्रचण्ड है मारै सब कूँ घेर
दया बाई
शबद
उपदेश का अंग - है मन धोवहु तन कै मैली
नहीं नाव नहिं केवट बेड़ा फिरत फिरत दिन ऐलीपाँच पचीस तीन घट भीतर कठिन कलुख जिय भैली
गुलाल साहब
दोहा
मुख ग्रीषम पावस नयन तन भीतर जड़काल
मुख ग्रीषम पावस नयन तन भीतर जड़कालपिय बिन तिय तीन ऋतु कबहुँ न मिटैं 'जमाल'
जमाल
राग आधारित पद
ग्राम - स्वर्ग लोक में ग्राम जो प्रगट भये हैं तीन
स्वर्ग लोक में ग्राम जो प्रगट भये हैं तीनद्वै तेहि उतरे अवनि में एक सुर राख्यौ बीन
