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ना'त-ओ-मनक़बत
तुम्हारी ज़ात है वो पाक ज़ात या-वारिसकि जिस में सब हैं ख़ुदा की सिफ़ात या-वारिस
एजाज़ वारसी
ना'त-ओ-मनक़बत
जज़्ब है ताबिश-ए-नज़र ख़त्म-ए-रुसुल की ज़ात मेंआई जो बन के शम-ए’-हक़ अंजुमन-ए-हयात में
शकील बदायूँनी
सूफ़ी उद्धरण
ऊँची ज़ात वाला ऊँचा नहीं, सिर्फ अच्छे आमाल वाला ऊँचा है।
ऊँची ज़ात वाला ऊँचा नहीं, सिर्फ अच्छे आमाल वाला ऊँचा है।
तुलसीदास ब्रजवासी
ना'त-ओ-मनक़बत
मा'बूद है तू ज़ात तेरी लम-यज़ल की है'आबिद तिरा हर एक नबी और वली है
मोहम्मद इब्राहीम सिद्दीक़ी
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फ़ारसी कलाम
ऐ ग़नी ज़ात-ए-तू अज़ इक़रार-ओ-अज़ इंकार-ए-माबे-नियाज़ अज़ मा-ओ-अज़ पैदाई-ओ-इज़्हार-ए-मा
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
पद
ऐ आज आयो आयो सुरजवंश छत्रपत राजाराम लंका नगर जीत
ऐ आज आयो आयो सुरजवंश छत्रपत राजाराम लंका नगर जीतमन इंछा फल पायो आनंद भायो
बैजू बावरा
कलाम
है ज़ात कंज़-ए-मख़्फ़ी ज़ात-ए-बक़ा-ए-मिर्ज़ापाया जो 'इल्म-ए-मुतलक़ अपने में आए मिर्ज़ा
शाह सिद्दीक़ सौदागर
दोहा
इंद्रियों का बर्णन - जित जित इन्द्री जात है तित मन कूँ ले जात
जित जित इन्द्री जात है तित मन कूँ ले जातबुधि भी संगहि जात है ये निस्चय करि बात
चरनदास जी
सलोक
फ़रीदा सो दर सच्चा देह जित मन लबु जाह
फ़रीदा सो दर सच्चा देह जित मन लबु जाहराज माल कह खउ अमालन वच लिखाह
बाबा फ़रीद
पद
मद्ध अकास आप जहँ बैठे जोत शब्द उजियारा हो
मद्ध अकास आप जहँ बैठे जोत शब्द उजियारा होसेत सरूप राग जहँ फूलै साँईँ करत बिहारा हो
कबीर
पद
मरकज़ अर्ज़-ओ-समा का क़ायम ज़ात से है फ़ुक़रा की
मरकज़ अर्ज़-ओ-समा का क़ायम ज़ात से है फ़ुक़रा कीकाम जहाँ का जारी सब बर्कात से है फ़ुक़रा की
कवि दिलदार
पद
जिसने पहचाना ज़ात को अपनी जाना ज़ात ख़ुदा की
जिसने पहचाना ज़ात को अपनी जाना ज़ात ख़ुदा कीबैठा जमइय्यत कर हासिल मिली लज़्ज़त उसे बक़ा की