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सूफ़ी उद्धरण
शाइरी अपने आप में कोई मक़सद नहीं है, बल्कि मक़सद हासिल करने का ज़रिया है।
शाइरी अपने आप में कोई मक़सद नहीं है, बल्कि मक़सद हासिल करने का ज़रिया है।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
नज़्म
तल्बा से ख़िताब
जहाँ में रहने न पाए निशान पस्ती काहर इक ज़रिए’ को ख़ुर्शीद-ए-ज़र-निगार करो
बर्क़ वारसी
ना'त-ओ-मनक़बत
नबी जितने क़रीब 'अर्श-ए-आ'ज़म होते जाते हैंज़रिए' बख़्शिश-ए-उम्मत के मोहकम होते जाते हैं
अब्र अहसनी
समस्त