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सूफ़ी लेख
हिन्दुस्तानी मौसीक़ी और अमीर ख़ुसरौ
इंसानी जज़्बात के इज़हार के लिए इंसान ने जिन फ़ुनून को वज़ा’ किया है उनमें से
उमैर हुसामी
सूफ़ी लेख
हज़रत शाह नियाज़ बरेलवी की शाइरी में इरफान-ए-हक़
(उर्दू अदब की तारीख़ स० 43-44 नाशिरः तख़्लीक़-कार पब्लिशर, दिल्ली)दिल्ली के दौर-ए-सानी के शोरा में मीर
अहमद फ़ाख़िर
सूफ़ी लेख
मसनवी की कहानियाँ -1
देर हो जाने से शेर ग़ुर्रा ग़ुर्रा कर ज़मीन को नोच डाल रहा था और कहता
ज़माना
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क़व्वाली और अमीर ख़ुसरो – अहमद हुसैन ख़ान
फ़न्न-ए-मौसीक़ी या राग बजाए ख़ुद निहायत दिलचस्प फ़न है। आवाज़ की मुख़्तलिफ़ बुलंदियों को सात मदारिज