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सूफ़ी लेख
हिन्दुस्तानी क़व्वाली के विभिन्न प्रकार
वसीम ख़ैराबादीग़ुस्ल-ए-मरक़द को मलक लाए मुसफ़्फ़ा पानी
सुमन मिश्र
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शैख़ फ़रीदुद्दीन अत्तार और शैख़ सनआँ की कहानी
शैख़ गुफ़्तश इमशब अज़ ख़ून-ए-जिगर ।कर्द: अम सद बार ग़ुस्ल ऐ बे-ख़बर ।।
सुमन मिश्र
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तज़्किरा-ए-फ़ख़्र-ए-जहाँ देहलवी
(वरक़24 ब)सन 4 जलूस-ए-अहमद शाही में बुध के बा’द और जुमे’रात की सुब्ह को बेदारी की
निसार अहमद फ़ारूक़ी
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हज़रत गेसू दराज़ हयात और ता’लीमात
मियाँ यमीनुर्रहमान ने हज़रत के विसाल की ख़बर मियाँ लहरा को पहुँचाई कि मख़दूम का इंतिक़ाल
निसार अहमद फ़ारूक़ी
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ख़ानक़ाह-ए-फुलवारी शरीफ़ के मरासिम-ए-उ’र्स
दो तिहाई घंटा में ज़ियारत तमाम होकर शीरीनी तक़्सीम होती है और ग़ुस्ल का पानी गुलाब
निज़ाम उल मशायख़
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बिहार के प्रसिद्ध सूफ़ी शाइर – शाह अकबर दानापुरी
शाह अकबर दानापूरी का ज़्यादा-तर समय आगरे में बीता। उनके लहजे में भी आगरे की बोली
सुमन मिश्र
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शैख़ हुसामुद्दीन मानिकपूरी
(शाह नियाज़ बरेलवी)लेकिन अब मैं एक बेहतरीन इ’ल्म का मालिक हूँ जो किताबों के इ’ल्म से
उमैर हुसामी
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सय्यिद सालार मस्ऊद ग़ाज़ी
मुंशी मोहम्मद ख़लील ने आपकी करामत के बारे में लिखा है1926 ई’स्वी में आपके उ’र्स के
जुनैद अहमद नूर
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शैख़ सलीम चिश्ती
95 साल की उ’म्र पाई। आप ने आठ लड़के और चौदह लड़कियाँ कुल 22 औलादें बाक़ी
ख़्वाजा हसन निज़ामी
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सुल्तान सख़ी सरवर लखदाता-मोहम्मदुद्दीन फ़ौक़
धोंकल में आपकी यादगार और मेलाधोंकल में हर साल ब-माह-ए-जून (माह-ए-हाड़) सख़ी सरवर के नाम से
सूफ़ी
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हज़रत शैख़ अबुल हसन अ’ली हुज्वेरी रहमतुल्लाह अ’लैहि
मंज़िल-ए-सुलूक के तय करने में जो मुजाहदे किए उनमें एक अ’जीब-ओ-ग़रीब वाक़िआ’ ख़ुद ही ये बयान