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सूफ़ी लेख
हिन्दुस्तान में क़ौमी यक-जेहती की रिवायात-आ’ली- बिशम्भर नाथ पाण्डेय
वो ज़माना ऐसा था कि चाहे शिवाजी हो या औरंगज़ेब गोलकुंडा का सुल्तान हो या बीजापुर
मुनादी
सूफ़ी लेख
सन्यासी फ़क़ीर आंदोलन – भारत का पहला स्वाधीनता संग्राम
बंगाल और बिहार में फैले इस विद्रोह के नेता मजनू शाह मलंग , मूसा शाह, चिराग़
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
जिन नैनन में पी बसे दूजा कौन समाय
मुझसे कहा गया कि चूंकि मैं शहर से बाहर का हूँ इसलिये मुझे सबसे पहले एक
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
सूर के माखन-चोर- श्री राजेन्द्रसिंह गौड़, एम. ए.
खैलत तें उठि भज्यौ सखा यह, इहिं घर आइ छपान्यौ। ऐसे एक नहीं, अनेक बहाने बाल-कृष्ण ने
सम्मेलन पत्रिका
सूफ़ी लेख
निरंजनी साधु
निरंजनी साधुइनका पंथ भी संवत् 1600 के पीछे हरिदास जी से चला है। हरिदास को कोई
भारतीय साहित्य पत्रिका
सूफ़ी लेख
क़व्वालों के क़िस्से
अज़ीज़ नाज़ाँ (7 मई 1938 - 8 अक्टूबर 1992) मुंबई के एक प्रतिष्ठित मालाबारी मुस्लिम परिवार
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
बाबा फ़रीद शकर गंज
इस दफ़ा’ दरवाज़ा बंद कर दिया जाता है और जो लोग ज़ख़्मी हो जाते हैं उनकी
निज़ाम उल मशायख़
सूफ़ी लेख
ग्रामोफ़ोन क़व्वाली
कुछ क़व्वाल ऐसे भी थे जिन्होंने लोकप्रियता में बड़े-बड़े उस्ताद गायकों को भी पीछे छोड़ दिया।
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
अमीर खुसरो- पद्मसिंह शर्मा
भावुकता ने बेचारे मुल्ला की जान ले ली। खु़सरो की इस उक्ति में कौन-सा विष का
माधुरी पत्रिका
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अभागा दारा शुकोह - श्री अविनाश कुमार श्रीवास्तव
राजपूताने में हताश होने पर भी दारा को औरंगजेब से लड़ना पड़ा क्योंकि शत्रु देवराय नामक
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
अभागा दारा शुकोह
राजपूताने में हताश होने पर भी दारा को औरंगजेब से लड़ना पड़ा क्योंकि शत्रु देवराय नामक
अविनाश कुमार श्रीवास्तव
सूफ़ी लेख
रामावत संप्रदाय- बाबू श्यामसुंदर दास, काशी
रामानंद के जीवन-काल के 100 वर्षों में भारतवर्ष का राजनैतिक आकाश मंडल भयानक तथा प्रलयकारी मेघों
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
तज़्किरा इस्माई’ल आज़ाद क़व्वाल
ग्यारहवीं सदी ईसवी से मौजूदा बीसवीं सदी तक क़व्वाली ने कई मंज़िलें तय कीं लेकिन ये
अकमल हैदराबादी
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बहादुर शाह और फूल वालों की सैर
अम्माँ मैं तुम्हारा मतलब समझ गया, सैर की तारीख़ मुक़र्रर हो गई है। आज दस है