आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "हवस"
सूफ़ी लेख के संबंधित परिणाम "हवस"
सूफ़ी लेख
हज़रत शैख़ बू-अ’ली शाह क़लंदर
दस्त रा कोताह साज़द अज़ हवसब-शिकनद बा-चंग-ए-हिम्मत ईं क़फ़स
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी लेख
शाह नियाज़ बरैलवी ब-हैसिय्यत-ए-एक शाइ’र
सहर-ओ-शाम वहाँ ये सहर-ओ-शाम नहींबुल-हवस पाँव रखियो कभी इस के बीच
मयकश अकबराबादी
सूफ़ी लेख
बक़ा-ए-इन्सानियत में सूफ़ियों का हिस्सा (हज़रत शाह तुराब अ’ली क़लंदर काकोरवी के हवाला से) - डॉक्टर मसऊ’द अनवर अ’लवी
वो तो हैवान ब-शक्ल-ए-आदम है॥हआ-ओ-हवस और हिर्स-ओ-तमा’ से परहेज़ की तलक़ीन इस तरह है।
मुनादी
सूफ़ी लेख
तज़्किरा हज़रत शाह तसद्दुक़ अ’ली असद
सरमद ग़म-ए-इ’श्क़ बुल-हवस रा न-दहंदसोज़-ए-दिल-ए-परवानः मगस रा न-दहंद
इल्तिफ़ात अमजदी
सूफ़ी लेख
हज़रत मख़दूम अशरफ़ जहाँगीर सिमनानी के जलीलुल-क़द्र ख़ुलफ़ा - सय्यद मौसूफ़ अशरफ़ अशरफ़ी
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी लेख
बाबा फ़रीद के मुर्शिद और चिश्ती उसूल-ए-ता’लीम-प्रोफ़ेसर प्रीतम सिंह
यहाँ ख़्वाजा मुई’नुद्दीन के वो मुख़्तसर और जामे’ अल्फ़ाज़ याद आते हैं जो आपके लब-ए-मुबारक से
मुनादी
सूफ़ी लेख
मसनवी की कहानियाँ -1
एक सब्ज़ा-ज़ार में चरिन्दों की शेर से हमेशा कश्मकश रहती थी चूँकि शेर चरिन्दों की ताक