आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "andar"
Kalaam के संबंधित परिणाम "andar"
कलाम
ज़ाहर वेखां जानी ताईं नाले अंदर सीने हूबिरहों मारी नित फ़िरां मैं हस्सण लोक नाबीने हू
सुल्तान बाहू
कलाम
उस का ज़िक्र है जारी हर एक साँस के अंदरये मसअला अब तो पहचानूँ क्या हो जिस्म के अंदर
डा. इरशाद बल्ख़ी
कलाम
कभी का'बे में पाता हूँ कभी बुत-ख़ाने के अंदरलगा के तुझ से दिल फिरता हूँ मारा-मारा मैं दर-दर
फ़राज़ वारसी
कलाम
अंदर भी हू बाहर भी हू'बाहू' कथाँ लुभीवे हूसे रियाज़ ताँ कर कराहाँख़ून जिगर दा पीवे हू
सुल्तान बाहू
कलाम
अंदर हू ते बाहर हौ हू बाहर कत्थे जलेंदा हूहू दा दाग़ मोहब्बत वाला हर-दम नाल सड़ेंदा हू
सुल्तान बाहू
कलाम
ख़ुदा जाने ये किस शहर अंदर हमन को लादे डाला हैन दिलबर है न साक़ी है न शीशा है न पियाला है
पंडित चंद्रभान ब्राह्मण
कलाम
अंदर भाई अंदर बालण अंदर दे विच धूहाँ हूशाह-रग थीं रब्ब नेड़े लद्धा इश्क़ कीताम जद सूहाँ हू
सुल्तान बाहू
कलाम
नुमायाँ हो न चेहरे से न आँखों से न बातों सेमोहब्बत राज़-अंदर राज़-अंदर राज़ बन जाए
ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
कलाम
चुपके-चुपके अंदर-अंदर तू ने ऐ शौक़-ए-निहाँदिल को मेरे राज़-दार-ए-हुस्न-ए-पिनहाँ कर दिया