आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "fikr-e-uqbaa"
Kalaam के संबंधित परिणाम "fikr-e-uqbaa"
कलाम
नहीं रहने की जा दुनिया 'जमाली' फ़िक्र-ए-’उक़्बा करहमेशा कोई दुनिया में अरे नादाँ रहा भी है
क़ाज़ी उमराव अली जमाली
कलाम
फ़िक्र-ए-उक़्बा कर के नाहक़ वक़्त क्यूँ ज़ाएअ' करूँउस को ख़ुद ही लाज होगी जिस का कहलाता हूँ मैं
कामिल शत्तारी
कलाम
फ़ना बुलंदशहरी
कलाम
कामिल शत्तारी
कलाम
छुड़ा देती है फ़िक्र-ए-ग़ैर से तासीर-ए-मय-ख़ानामिली है 'अर्श की ज़ंजीर से ज़ंजीर-ए-मय-ख़ाना
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
इल्मों बाझ जे फ़क़र कमावे, काफ़िर मरे दीवाना हूसै वर्हयाँ दी करे इबादत अल्लाह थीं बेगाना हू
सुल्तान बाहू
कलाम
राह फ़क़र दा परे परेरे, ओड़क कोई न दिस्से हून उथ पढ़न पढ़ावण कोई न उथ मसले क़िस्से हू
सुल्तान बाहू
कलाम
राह फ़क़र दा तद लधोसे जद हथ फड़योसे कासा हूतरक दुनिया तौ तद थ्योसे जद फ़क़ीर मिलयोसे ख़ासा हू
सुल्तान बाहू
कलाम
ख़ाम की जाणन सार फ़क़र दी महरम नहीं दिल दे हूआब मिट्टी थीं पैदा होए खामी भांडे गिल्ल दे हू
सुल्तान बाहू
कलाम
बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी हैतर्क-ए-तअल्लुक़ काम न आया उन से मोहब्बत आज भी है