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कलाम
बाक़िर शाहजहांपुरी
कलाम
तेरा ग़म रहे सलामत मेरे दिल को क्या कमी हैयही मेरी बंदगी है यही मेरी ज़िंदगी है
बाक़िर शाहजहांपुरी
कलाम
'अजब अंदाज़ तुझ को नर्गिस-ए-मस्ताना आता हैकि हर होशियार बनने को यहाँ दीवाना आता है
बाक़िर शाहजहांपुरी
कलाम
बा-वज़ू हो कर पिएँ सब मय-कदे में मिल के मुलहो रहे हैं एक रिंद ’आरिफ़-ओ-’आक़िल के क़ुल