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कलाम
हो गया मा’लूम टूटा जब तिलिस्म-ए-ज़िंदगीमा'रिफ़त ऐ’न-ए-ख़ुदा की है ये ’इरफ़ान-ए-हयात
अब्दुल हादी काविश
कलाम
बर्गश्ता-ओ-बद-ज़न सा पाते हैं ख़ुदा हाफ़िज़अब हम तिरी महफ़िल से जाते हैं ख़ुदा हाफ़िज़
ताबिश कानपुरी
कलाम
अल्लाह पढ़यों हाफ़िज़ होयों न गया हिजाबों पर्दा हूपढ़ पढ़ आलिम फ़ाज़िल होयों तालिब होयों ज़र दा हू
सुल्तान बाहू
कलाम
अल्लाह पढ़यों हाफ़िज़ होयों न गया हिजाबों पर्द: हूपढ़ पढ़ आलिम फ़ाज़िल होयों तालिब होयों ज़र्दा हू
सुल्तान बाहू
कलाम
हाफ़िज़ पढ़ पढ़ करन तकब्बर मुल्लाँ करन वडाई हूसावन माह दे बदलाँ वाँगूँ फिरन किताबाँ चाई हू ।
सुल्तान बाहू
कलाम
फ़ना होना मोहब्बत में हयात-ए-जावेदानी हैकिसी क़ातिल पे दम निकले तो लुत्फ़-ए-ज़िंदगानी है
फ़ना लखनवी
कलाम
मोहम्मद बादशाह क़दीर
कलाम
क़ुर्बान-ए-फ़ना एक तजल्ली-ए-तेरी होएज़ुल्मत-कदा-ए-हस्तती-ए-मौहूम से निकले
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
कलाम
तुम्हें मैं जानता हूँ तुम बदलते हो हज़ारों रंगनहीं मैं ग़ैर उठा कर पर्दा-ए-रू-ए-बशर आओ
आग़ा मोहम्मद दाऊद
कलाम
यही इरशाद-ए-मुर्शिद है यही तो राज़-ए-मुर्शिद हैमुराद पाया मेरा नफ़्स-ए-’अदू-ए-बे-शरम मेरा
मोहम्मद बादशाह क़दीर
कलाम
लब्ब-ए-लुबाब-ए-जुमला कमालात-ए-'इश्क़ हैमुम्किन नहीं कि 'इश्क़ भी हो औलिया न हो