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कलाम
हमें क्या ग़म क़ियामत में जो पुर्सिश होने वाली हैकि जब वो फ़ित्ना-गर आया तो फिर मैदान ख़ाली है
दाग़ देहलवी
कलाम
मुसलमानों सँभल जाओ क़यामत आने वाली हैगुनाहों से करो तौबा क़यामत आने वाली है
क़ैसर सिद्दीक़ी समस्तीपुरी
कलाम
महफ़िल-ए-रिंदाँ में जाम मुल का होना चाहिएज़ोहद का क़ुल हो चुका क़ुलक़ुल का होना चाहिए
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
कलमे लक्ख करोड़ां तारे वली कीते सै राहीं हूकलमे नाल बुझाए दोज़ख़ जिथ अग्ग बले अज़गाही हू
सुल्तान बाहू
कलाम
बा'द अज़ फ़ना मज़ार पे आने से फ़ाइदामरने से हम मिटे तो जलाने से फ़ाइदा
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
ख़ुद पर्दा में छुप बैठे हैं और दुनिया को हैरानी हैहैं चारों जानिब ढूँढ रहे मख़्लूक़ हुई दीवानी है
मोहर्रम अली चिश्ती
कलाम
खुल गए ज़ख़्मों के मुँह क्या जाने क्या कहने को हैंक्या नमक-दान-ए-सितम को बे-मज़ा कहने को हैं