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कलाम
ख़ुशी से दूर हूँ ना-आश्ना-ए-बज़्म-ए-’इशरत हूँसरापा दर्द हूँ वाबस्ता-ए-ज़ंजीर-क़िस्मत हूँ
शाह मोहसिन दानापुरी
कलाम
इश्क़ दी गल्ल अवल्ली जेहड़ा शरआ थीं दूर हटावे हूक़ाज़ी छोड़ कज़ाई जाण जद इश्क़ तमाँचा लावे हू
सुल्तान बाहू
कलाम
मन की दुनिया मन की दुनिया सोज़-ओ-मस्ती जज़्ब-ओ-शौक़तन की दुनिया तन की दुनिया सूद-ओ-सौदा मक्र-ओ-फ़न
अल्लामा इक़बाल
कलाम
’अज़ाब-ए-गोर की निस्बत से फिर भी ऐ'श-ओ-’इशरत हैअगरचे दहर में मोहताज है तू इक लब-ए-नाँ का
सय्यद अली केथ्ली
कलाम
ये फ़ज़ा ये चाँदनी रातें ये दौर-ए-जाम-ओ-मयमस्तियों में ग़र्क़ हो जाने का मौसम आगया
इक़बाल सफ़ीपुरी
कलाम
यूँ दाद-ए-सुख़न मुझ को देते हैं ’इराक़-ओ-पारसये काफ़िर-ए-हिन्दी है बे-तेग़-ओ-सिनाँ ख़ूँ-रेज़
अल्लामा इक़बाल
कलाम
’उक़ाबी शान से झपटे थे जो बे-बाल-ओ-पर निकलेसितारे शाम के ख़ून-ए-शफ़क़ में डूब कर निकले
अल्लामा इक़बाल
कलाम
न तो मय-कदे की है जुस्तुजू न तलाश-ए-बादा-ओ-जाम हैजो नफ़्स नफ़्स को पिला गई मुझे उस निगाह से काम है
इक़बाल सफ़ीपुरी
कलाम
कुछ नहीं हासिल ब-जुज़ तन-परवरी-ओ-फ़र्बहीनफ़्स-ए-काफ़िर ने बहुत सी कामरानी देख ली
सय्यद अली केथ्ली
कलाम
अहवाल-ए-मोहब्बत में कुछ फ़र्क़ नहीं ऐसासोज़-ओ-तब-ओ-ताब अव्वल सोज़-ओ-तब-ओ-ताब आख़िर