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कलाम
अनवर फ़र्रूख़ाबादी
कलाम
जिस्म दमकता ज़ुल्फ़ घनेरी रंगीं लब आँखें जादूसंग-ए-मरमर ऊदा बादल सुर्ख़ शफ़क़ हैराँ आहू
जावेद अख़्तर
कलाम
सँभल ऐ दिल किसी का राज़ बे-पर्दा न हो जाएये दीवानों की महफ़िल है कोई रुस्वा न हो जाए
अमीर बख़्श साबरी
कलाम
मेरी आँखों का आख़िर दूर ये आज़ार कैसे होतुझे किस तरह से देखूँ तिरा दीदार कैसे हो
शाह तक़ी राज़ बरेलवी
कलाम
जीने की आरज़ू है तो मस्ताना बन के जीया'नी ग़ुलाम-ए-मुर्शिद-ए-मय-ख़ाना बन के जी
शाह तक़ी राज़ बरेलवी
कलाम
मैं अपने साक़ी का बंदा हूँ और क्या जानूँउसी के जाम का मारा हूँ और क्या जानूँ
शाह तक़ी राज़ बरेलवी
कलाम
पर्दा-ए-शौक़ है यही सूरत-ए-राज़ है यहीतुम हो नज़र के सामने मेरी नमाज़ है यही
शाह तक़ी राज़ बरेलवी
कलाम
बच बच के जहाँ की नज़रों से वो मेरा तड़पना भूल गईजो बात कि सब पर ज़ाहिर थी वो बात भी दुनिया भूल गई
शाह तक़ी राज़ बरेलवी
कलाम
मुझ को काफ़ी है ये संग-ए-दर-ए-जानाना मिरायही का'बा है मिरा और यही बुत-ख़ाना मिरा
शाह तक़ी राज़ बरेलवी
कलाम
जहाँ के राज़-दाँ तुम हो जहाँ का राज़-दाँ मैं हूँजहाँ वो है जहाँ तुम हो जहाँ वो है जहाँ मैं हूँ