आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "khum"
Kalaam के संबंधित परिणाम "khum"
कलाम
अनवर फ़र्रूख़ाबादी
कलाम
ख़ाम की जाणन सार फ़क़र दी महरम नहीं दिल दे हूआब मिट्टी थीं पैदा होए खामी भांडे गिल्ल दे हू
सुल्तान बाहू
कलाम
कोई ख़ुम के ख़ुम पिए हुए कोई एक जाम का मुंतज़रतिरे रिंद फिर भी हैं मुतमइन तेरे मय-कदे के निज़ाम से
मख़मूर देहलवी
कलाम
रियाज़ ख़ैराबादी
कलाम
तिरा मय-कदा सलामत तिरे ख़ुम की ख़ैर साक़ीमिरा नश्शा क्यूँ उतरता मुझे क्यूँ ख़ुमार होता
अमीर मीनाई
कलाम
है ख़ुम तो मय से लबालब ये तिश्ना-कामी क्यूँलो तोड़ मोहर-ए-ख़ुदी मय भी पीजिए तो सही
स्वामी रामतीर्थ
कलाम
रिंद वो हूँ कि मिरी ख़ाक से ख़ुम बनते हैंपाँव मर कर भी निकलता नहीं मय-ख़ाने से
मिर्ज़ा क़ादिर बख़्श साबिर
कलाम
शीशा है जाम है न ख़ुम अस्ल तो रौनक़ें हैं गुमलाख सजा रहे हो तुम बज़्म अभी सजी नहीं
ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
कलाम
क्या जोश में है अब मय-ए-वहदत ख़ुम-ए-दिल मेंउबली है पड़ी 'रूमी'-ओ-'अ'त्तार' से कह दो
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
लगा दे मुँह से ख़ुम साक़ी कि हैं मुद्दत के प्यासे हमन होगा हल्क़ भी उन शीशा-ओ-साग़र से तर अपना