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Sufinama

ये जो हल्का हल्का सुरूर है

अब्दुल हमीद अदम

ये जो हल्का हल्का सुरूर है

अब्दुल हमीद अदम

MORE BYअब्दुल हमीद अदम

    ये जो हल्का हल्का सुरूर है

    ये तेरी नज़र का क़ुसूर है

    कि शराब पीना सीखा दिया

    तिरे प्यार ने तिरी चाह ने

    तेरी बहकी-बहकी निगाह ने मुझे इक शराबी बना दिया

    शराब कैसी ख़ुमार कैसा

    ये सब तुम्हारी नवाज़िशें हैं

    पिलाई है किस नज़र से तू ने

    कि मुझ को अपनी ख़बर नहीं है

    तेरी बहकी-बहकी निगाह ने मुझे इक शराबी बना दिया

    सारा जहाँ मस्त जहाँ का निज़ाम मस्त

    ख़ुम मस्त शीशा मस्त सुबू मस्त जाम मस्त

    दिन मस्त रात मस्त सहर मस्त शाम मस्त

    यूँ तो साक़ी हर तरह की तेरे मयख़ाने में है

    वो भी थोड़ी सी जो इन आँखों के पैमाने में है

    सब समझता हूँ तेरी इश्वा-गरी साक़ी

    काम करती है नज़र नाम है पैमाने का

    तेरी बहकी-बहकी निगाह ने मुझे इक शराबी बना दिया

    तेरा प्यार है मेरी ज़िंदगी

    नमाज़ आती है मुझ को वुज़ू आता है

    सज्दा कर लेता हूँ जब सामने तू आता है

    जो तेरी ख़ुशी वो मेरी ख़ुशी

    ये मेरे जुनूँ का है मो'जिज़ा

    जहाँ अपने सर को झुका दिया

    वहाँ मैं ने का'बा बना दिया

    मेरे बा'द किस को सताओगे

    मैं ने उन के सामने अव्वल तो ख़ंजर रख दिया

    फिर कलेजा रख दिया दिल रख दिया सर रख दिया

    और 'अर्ज़ किया

    मेरे बा'द किस को सताओगे

    मुझे किस तरह से मिटाओगे

    कहाँ जा के तीर चलाओगे

    मेरी दोस्ती की बलाएँ लो

    मुझे हाथ उठा कर दुआएँ दो

    तुम्हें एक क़ातिल बना दिया

    तेरी बहकी-बहकी निगाह ने मुझे इक शराबी बना दिया

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    नुसरत फ़तेह अली ख़ान

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