परिणाम "laila"
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ख़ुद चली आएगी लैला क़ैस का दिल चाहिए'इश्क़ में तासीर है पर जज़्ब-ए-कामिल चाहिए
लैला की तरफ़ ताक न महमिल की तरफ़ देखऐ 'क़ैस' जो है ज़ौक़-ए-नज़र दिल की तरफ़ देख
फिर चराग़-ए-लाला से रौशन हुए कोह-ओ-दमनमुझ को फिर नग़्मों पे उकसाने लगा मुर्ग़-ए-चमन
सहारा मौजों का ले ले के बढ़ रहा हूँ मैंसफ़ीना जिस का है तूफ़ाँ वो नाख़ुदा हूँ मैं
कलियाँ ये सुर्ख़ सुर्ख़ नहीं लाला-ज़ार मेंमेहंदी लगी है दस्त-ए-उ'रूस-ए-बहार में
उठाए हैं मज्नूँ ने लैला की ख़ातिरशुतुर-ग़मज़ा-ए-सार-बाँ कैसे कैसे
बला-कशान-ए-ग़म-ए-इंतिज़ार हम भी हैंख़राब-ए-गर्दिश-ए-लैल-ओ-नहार हम भी हैं
जब मिरे ऐवान-ए-दिल पर छा गए जल्वे तिरेनंग-ए-महमिल लैला-ए-हसरत नज़र आई मुझे
दिल-ए-मजनूँ से निकली आह या बिजली कोई चमकीकि महमिल से तड़प कर लैला-ए-महमिल-नशीं निकली
कभी अपना भी नज़ारा किया है तू ने ऐ मजनूँकि लैला की तरह तू ख़ुद भी है महमिल नशीनों में
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