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कलाम
ऐ शो’ला-ए-जवाला जब से लौ तुझ से लगाए बैठे हैंइक आग लगी है सीने में और सब से छुपाए बैठे हैं
कामिल शत्तारी
कलाम
न तो मय-कदे की है जुस्तुजू न तलाश-ए-बादा-ओ-जाम हैजो नफ़्स नफ़्स को पिला गई मुझे उस निगाह से काम है
इक़बाल सफ़ीपुरी
कलाम
अज़ीज़ुद्दीन रिज़वाँ क़ादरी
कलाम
बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी हैतर्क-ए-तअल्लुक़ काम न आया उन से मोहब्बत आज भी है
शकील बदायूँनी
कलाम
अल्लामा इक़बाल
कलाम
ऐ हज़रत-ए-मुश्किल-कुशा या बुल-हसन या मुर्तज़ातुम हो वली ज़ात-ए-ख़ुदा नाएब-ए-मोहम्मद मुस्तफ़ा
फ़क़ीर क़ादरी
कलाम
ऐ दिल-ए-पुर-सुरूर-ए-मन नाज़ न बन नियाज़ बनसाक़ी-ए-मस्त-ए-नाज़ की आँखों में सरफ़राज़ बन