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कलाम
उन ने कहा ये मुझ से अब छोड़ दुख़्त-ए-रज़ कोपीरी में ऐ दिवाने ये कौन मस्तियाँ हैं
मोहम्मद रफ़ी सौदा
कलाम
कनजड़े की सी हाट है दुनिया जिंस है सारे इकट्ठेमीठे चाहे मीठे ले ले खट्टे चाहे खट्टे
बहादुर शाह ज़फ़र
कलाम
फ़ना बुलंदशहरी
कलाम
था मौज-ए-दर्द में पैग़ाम-ए-वस्ल-ए-यार क्या कहिएवहीं था दामन-ए-साहिल जहाँ साहिल नहीं समझा
फ़ना बुलंदशहरी
कलाम
औज-ए-विलायत के हो माह तख़्त-ए-ख़िलाफ़त के हो शाहदीन-ए-मोहम्मद की पनाह ऐ बादशाह-ए-अस्फ़िया
फ़क़ीर क़ादरी
कलाम
तुम्हें मैं जानता हूँ तुम बदलते हो हज़ारों रंगनहीं मैं ग़ैर उठा कर पर्दा-ए-रू-ए-बशर आओ
आग़ा मोहम्मद दाऊद
कलाम
ख़ादिम हसन अजमेरी
कलाम
क़ुर्बान-ए-फ़ना एक तजल्ली-ए-तेरी होएज़ुल्मत-कदा-ए-हस्तती-ए-मौहूम से निकले