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कलाम
ये हम ने माना कि आज ख़ंजर मिरा गुलू में नहीं रहेगाकमर में क़ातिल के ओ सितम-गर हमेशा तू भी नहीं रहेगा
अज्ञात
कलाम
टुक साथ हो हसरत दिल-ए-मरहूम से निकले'आशिक़ का जनाज़ा है ज़रा धूम से निकले
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
कलाम
हर नक़्शा किस से हक़ के सिवा मुम्किनात काहर फ़र्द है जहाँ में आईना ज़ात का
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
कलाम
'सौदा-गर' हाल-ए-मिर्ज़ा पाकर ये कह रहा हैहै ज़ात कंज़-ए-मख़्फ़ी ज़ात-ए-बक़ा-ए-मिर्ज़ा
शाह सिद्दीक़ सौदागर
कलाम
बा'द अज़ फ़ना मज़ार पे आने से फ़ाइदामरने से हम मिटे तो जलाने से फ़ाइदा
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
क़ाज़ी उमराव अली जमाली
कलाम
ख़ंजर-ए-तस्लीम मैं सर दे के इस्मा’ईल हूँलीजिए है 'ईद क़ुर्बां 'इश्क़ ने रुस्वा किया
सादिक़ अली शाह
कलाम
का’बा-ए-अबरू दिखा औ बुत ख़ुदा के वास्तेशक्ल-ए-मिज़्गाँ हाथ उठाए हों दु'आ के वास्ते
ख़वाजा वज़ीर लखनवी
कलाम
शक्ल आँखों में मिरी जल्वा-नुमा किस की हैपर्दा-ए-दिल से जो निकली ये सदा किस की है