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कलाम
जब मिरा ज़ौक़-ए-नज़र हुस्न-आज़मा हो जाएगालाखों पर्दों से भी वो जल्वः-नुमा हो जाएगा
सीमाब अकबराबादी
कलाम
वस्ल है पर दिल में अब तक ज़ौक़-ए-ग़म पेचीदा हैबुलबुला है ऐ'न दरिया में मगर नम-दीदा है
आसी गाज़ीपुरी
कलाम
बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी हैतर्क-ए-तअल्लुक़ काम न आया उन से मोहब्बत आज भी है
शकील बदायूँनी
कलाम
शौक़-ए-नज़ारा है जब से उस रुख़-ए-पुर-नूर काहै मिरा मुर्ग़-ए-नज़र परवाना शम्अ'-ए-तूर का
इब्राहीम ज़ौक़
कलाम
अल्लामा इक़बाल
कलाम
ऐ हज़रत-ए-मुश्किल-कुशा या बुल-हसन या मुर्तज़ातुम हो वली ज़ात-ए-ख़ुदा नाएब-ए-मोहम्मद मुस्तफ़ा
ग़ुलाम रसूल क़ादरी
कलाम
ऐ दिल-ए-पुर-सुरूर-ए-मन नाज़ न बन नियाज़ बनसाक़ी-ए-मस्त-ए-नाज़ की आँखों में सरफ़राज़ बन