धुन में है धुन
रोचक तथ्य
سکندر شاد قوال کی آواز میں گیت چشتیہ فلم ’’رام تیری گنگا میلی‘‘ بطرز ’’سن صائباں سن‘‘
धुन में है धुन
अपनी ही धुन
ख़्वाजा का दीवाना हूँ मैं
गाऊँ उन के कुन
उन का क़लंदर हूँ मैं
मस्ती में यूँ चूर हूँ
बस चिश्तिया जाम पी-पी कर
मैं मख़मूर हूँ
मुझ को ग़रज़ क्या है दैर-ओ-हरम से
निस्बत है ख़्वाजा के लुत्फ़-ओ-करम से
दुनिया उसे अब समझिए पाप या पुन्न
धुन में है धुन
मैं क्या जानूँ का'बा कलीसा और क्या गुरुद्वारा है
मैं ने जब जब पुकारा है तो ख़्वाजा को पुकारा है
इस लिए बनाया ये हाल-ए-फ़क़ीराना है
जो देखे वो समझे ये तो ख़्वाजा का दीवाना है
तू भी ऐसा बन जा ज़रा बात मेरी सुन
धन में है धुन
बस उठते और बैठते मुझ को यही काम है
आठूँ फिर लब पे बस ख़्वाजा ही का नाम है
मुझ को नवाज़ेंगे ग़रीब नवाज़ है
मेरा भी 'अक़ीदा है उन्हीं पे नाज़ है
इस लिए नाम को ये मैं ने लिया चुन
धन में है धुन
- पुस्तक : Sikandar Shad Qawwal, Part 1 (पृष्ठ 6)
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