Sufinama

ग़ज़लें

सूफ़ी ग़ज़लों का विशाल संग्रह

1833 -1889

क्लासिकी शैली और पैटर्न के प्रतिष्ठित शायर,अपनी किताब "सुख़न-ए-शोरा" के लिए मशहूर

1769 -1851

मुग़ल बादशाह शाह आ’लम सानी के उस्ताद

1906 -1993

मा’रूफ़ वारसी सूफ़ी और अदीब-ओ-शाइ’र

1907 -1985

लखनऊ के मशहूर ताजिर

-1953

मीलाद-ए-अकबर के मुसन्निफ़ और ना’त गो-शाइ’र

1934 -1989

औघट शाह वारसी के चहेते मुरीद

1843 -1928

मा’रूफ़ सूफ़ी शाइ’र-ओ-अदीब

1904 -1998

बिहार के नाम-वर शाइ’र, अदीब, मुसन्निफ़ और मुहक़्क़िक़

1816 -1893

कैफ़ियतुल-आ’रिफ़ीन और कंज़ुल-अंसाब के मुसन्निफ़ और राम-सागर गया के मशहूर सूफ़ी

1887 -1971

मा’रूफ़ हिन्दुस्तानी शाइ’र और हाजी वारिस अ’ली शाह के मुरीद

1940

बिहार की मशहूर साहित्यिक प्रतिभा, शायरी के साथ विभिन्न साहित्यिक विषयों पर अपनी पद्यात्मक रचनाओं के लिए जाने जाते हैं

रामपूर का एक क़ादिर-उल-कलाम शाइ’र

1995

ख़ानक़ाह-ए-बल्ख़िया फ़िदोसिया, फ़तूहा के सज्जादा-नशीं के साहब-ज़ादे

1886 -1961

हैदराबाद का रुबाई’-गो सूफ़ी शाइ’र

-1927

रुहानी शाइ’र और “वारिस बैकुंठ पठावन” के मुसन्निफ़

1253 -1325

ख़्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया के चहेते मुरीद और फ़ारसी-ओ-उर्दू के पसंदीदा सूफ़ी शाइ’र, माहिर-ए-मौसीक़ी, उन्हें तूती-ए-हिंद भी कहा जाता है

1916

दबिस्तान-ए-साबिरी का एक सूफ़ी शाइ’र

1829 -1900

दाग़ देहलवी के समकालीन। अपनी ग़ज़ल ' सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता ' के लिए प्रसिद्ध हैं।

1880 -1936

चौदहवीं सदी हिज्री का एक सूफ़ी शाइ’र

1690 -1785

पंजाबी ज़बान के सूफ़ी शाइ’र