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Sufinama

जब कि इधर तिरी निगाह पड़ी

ख़्वाजा मीर असर

जब कि इधर तिरी निगाह पड़ी

ख़्वाजा मीर असर

जब कि इधर तिरी निगाह पड़ी

मेरे ही दिल पे मेरी आह पड़ी

बे-तरह कुछ मिरे ही जाता है

दिल पे हालत अजब तबाह पड़ी

तू करे अब निबाह या करे

अपने ज़िम्मे तो याँ निबाह पड़ी

दम-ब-दम यूँ जो बद-गुमानी है

कुछ तो आशिक़ की तुझ को चाह पड़ी

तेरे कूचे में जाए बिन रहे

अब तो वाँ की 'असर' को राह पड़ी

स्रोत :
  • पुस्तक : दीवान-ए-असर, संकलन: कामिल क़ुरैशी (पृष्ठ 225)
  • रचनाकार : मीर असर
  • प्रकाशन : अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिन्द) (1978)

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