Font by Mehr Nastaliq Web

एक औ’रत का अ’ली से मदद तलब करना

रूमी

एक औ’रत का अ’ली से मदद तलब करना

रूमी

MORE BYरूमी

    रोचक तथ्य

    अनुवादः मिर्ज़ा निज़ाम शाह लबीब

    एक औरत हज़रत अ’ली के पास आई और कहा मेरा बच्चा नाले पर चढ़ गया है बुलाती हूँ तो आता नहीं और अगर उस के हाल पर छोड़ती हूँ तो डरती हूँ कि कहीं नीचे ना गिर पड़े। अगर डरा कर बुलाती हूँ तो इतनी समझ नहीं ख़तरे को समझे हाथ के इशारे को भी नहीं समझता और समझता भी है तो मुश्किल ये कि मानता नहीं। मैंने बहुतेरी दूध की धार निकाल कर दिखाई मगर वो है कि ख़तरे की तरफ़ ही रुख़ करता है। मुश्किल-कुशा ख़ुदा के वास्ते मेरी मदद कीजिए। मेरा दिल काँपा जाता है कहीं मेरे दिल का मेवा टूट कर झड़ ना पड़े।

    हज़रत अ’ली ने फ़रमाया कि किसी बच्चे को कोठे पर खड़ा करो ताकि बच्चा अपने हम-जिंस को देखे और नाले से अपनी जिन्स की तरफ़ आहिस्ता से जाए क्योंकि हम-जिंस अपने हम-जिंस पर फ़रेफ़्ता होता है। चुनांचे जब उस औ’रत ने एक बच्चा खड़ा किया तो उस का फ़र्ज़ंद अपने हम-जिंस को देखकर हँसता खेलता इधर चला आया और इस तरह नाले के अंदर गिरने से बच गया। पैग़ंबर आदमी की जिन्स से इसलिए हैं कि हम-जिंस की कशिश से मख़्लूक़ बदरौ में गिर पड़ने से बची रहे। हज़रत-ए-ख़ैरुलबशर सल्लल्लाहु अ’लैहि वसल्लम ने जो फ़रमाया मैं तुम्हारी ही मिस्ल हूँ इसकी हिक्मत यही है कि लोग अपनी जिनसियत की तरफ़ खिंचे चले आएँ और गुमराह ना होने पाएँ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : हिकायात-ए-रूमी हिस्सा-1 (पृष्ठ 163)
    • प्रकाशन : अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिन्द) (1945)

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY
    बोलिए