हमेशा नूर की बारिश ज़िया-ए-मुस्तफ़ा की है
रोचक तथ्य
منقبت در شان حضرت سید محی الدین پاشا قادری (کرنول-آندھرا پردیش)
हमेशा नूर की बारिश ज़िया-ए-मुस्तफ़ा की है
मज़ार-ए-पीर मुहिउद्दीन पर रहमत ख़ुदा की है
'अक़ीदत-मंद पर हर हाल में रहमत ख़ुदा की है
तुम्हारा जो हुआ उस के लिए तुम ने दु'आ की है
हैं महरूम-ए-’इलाज-ए-दर्द-ए-दिल कब तक रहूँ आख़िर
जो आया दर पे उस के दर्द की तुम ने दवा की है
ब-फ़ज़्ल-ए-ख़ालिक़-ए-'आलम मुरादें उस की बर आएँ
’इनायत सरफ़राज़ी जिस पे भी ग़ौस-उल-वरा की है
वसीले के सिवा हक़ तक रसाई ग़ैर-मुमकिन है
तसव्वुफ़ में मदद भी आप के हुस्न-ए-'अता की है
मु’ईन-ए-अहल-ए-’इरफ़ाँ आप को हक़ ने बनाया है
मुसलमाँ को ज़रूरत आप जैसे रहनुमा की है
ये वा'इज़ क्या हैं इन का वा'ज़ क्या इस में असर क्या
ये जुर्अत तो फ़क़त ख़ाक-ए-दर-ए-ग़ौसु-उल-वरा की है
किसी सूरत दर-ए-अक़्दस पे पहुँचूँ तो सुकूँ आए
यही इक आरज़ू-ए-दिल दिल-ए-बे-मुद्दआ' की है
करामत से उन ही की बन गए कितने वलीउल्लाह
ज़रूरत आप ही जैसे हमें अब रहनुमा की है
मिला है दामन-ए-ग़ौस-उल-वरा दस्त-ए-’अक़ीदत से
सदा ‘बेहिस’ नवाज़िश मुझ पे मेरे रहनुमा की है
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