पुर-नूर है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
पुर-नूर है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
पर्दा उठा है किस का सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
जल्वा है हक़ का जल्वा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
साया ख़ुदा का साया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
फ़स्ल-ए-बहार आई शक्ल-ए-निगार आई
गुलज़ार है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
फूलों से बाग़ महके शाख़ों पे मुर्ग़ चहके
'अह्द-ए-बहार आया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
पज़मुर्दा हसरतों के सब खेत लहलहाए
जारी हुआ वो दरिया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
गिल है चराग़-ए-सरसर गुल से चमन मो'अत्तर
आया कुछ ऐसा झोंका सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
क़तरा में लाख दरिया गुल में हज़ार गुलशन
नुशू-ओ-नुमा है क्या क्या सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
जन्नत के हर मकाँ की आईना-बंदियाँ हैं
आरास्ता है दुनिया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
दिल जगमगा रहे हैं क़िस्मत चमक उठी है
फैला नया उजाला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
चिकटे हुए दिलों के मुद्दत के मेल छूटे
अब्र-ए-करम वो बरसा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
बुलबुल का आशियाना छाया गया गुलों से
क़िस्मत ने रंग बदला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
अर्ज़-ओ-समा से मंगता दौड़े हैं भीक लेने
बाँटेगा कौन बाड़ा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
अनवार की ज़ियाएँ फैली हैं शाम ही से
रखती है मेहर कैसा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मक्का में शाम के घर रौशन हैं हर निगह पर
चमका है वो उजाला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
शौकत का दबदबा है हैबत का ज़लज़ला है
शक़ है मकान-ए-किस्रा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
ख़ुत्बा हुआ ज़मीं पर सिक्का पड़ा फ़लक पर
पाया जहाँ ने आक़ा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
आई नई हुकूमत सिक्का नया चिल्ले गा
'आलम ने रंग बदला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
रूह-उल-अमीं ने गाड़ा का'बा की छत पे झंडा
ता-'अर्श उड़ा फरेरा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
दोनों जहाँ की शाही ना-कतख़ुदा दुल्हन थी
पाया दुल्हन ने दुलहा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
पढ़ते हैं 'अर्श वाले सुनते हैं फ़र्श वाले
सुल्तान-नौ का ख़ुत्बा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
चाँदी है मुफ़लिसों की बांदी है ख़ुश-नसीबी
आया करम का दाता सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
'आलम के दफ़्तरों में तरमीम हो रही है
बदला है रंग-ए-दुनिया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
ज़ुल्मत के सब रजिस्टर हर्फ़-ए-ग़लत हुए हैं
काटा गया सियाहा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मुल्क-ए-अज़ल का सरवर सब सरवरों का अफ़सर
तख़्त-ए-अबद पे बैठा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
सूखा पड़ा है सावा दरिया हुआ समावा
है ख़ुश्क-ओ-तर पे क़ब्ज़ा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
नवाबियाँ सुधारें जारी हैं शाही आईं
कच्चा हुआ 'इलाक़ा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
दिन फिर गए हमारे सोते नसीब जागे
ख़ुर्शीद ही वो चमका सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
क़ुर्बान ऐ दो-शंबा तुझ पर हज़ार जुम'ए
वो फ़ज़्ल तू ने पाया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
प्यारे रबी’-ए-अव्वल तेरी झलक के सदक़े
चमका दिया नसीबा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
वो मेहर मेहर फ़रमा वो माह-ए-'आलम-आरा
तारों की छाओं आया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
नौशा बनाओ उन को दूल्हा बनाओ उन को
है 'अर्श तक ये शोहरा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
शादी रची हुई है बजते हैं शादियाने
दूल्हा बना वो दूल्हा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
महरूम रह न जाएँ दिन-रात बरकतों से
इस वास्ते वो आया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
'अर्श-ए-'अज़ीम झूमे का'बा ज़मीन चूमे
आता है 'अर्श वाला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
हुश्यार हों भिकारी नज़दीक है सवारी
ये कह रहा है डंका सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
बंदों को ’ऐश-ओ-शादी आ'दा को ना-मुरादी
कड़कैत का है कड़का सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
तारे ढुलक कर आए कासे कटोरे लाए
या'नी बटेगा सदक़ा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
आमद का शोर सुन कर घर आए हैं भिकारी
घेरे खड़े हैं रस्ता सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
हर जान मुंतज़िर है हर दीदा रह नगर है
ग़ौग़ा है मर्हबा का सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
जिब्रील सर झुकाए क़ुदसी परे जमाए
हैं सर्व-ए-क़द सितादा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
किस दाब किस अदब से किस जोश किस तरब से
पढ़ते हैं उन का कलिमा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
हाँ दीन वालो उट्ठो ता'ज़ीम वालो उट्ठो
आया तुम्हारा मौला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
उट्ठो हुज़ूर आए शाह-ए-ग़यूर आए
सुल्तान-ए-दीन-ओ-दुनिया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
उठो मुलक उठे हैं 'अर्श ओ फ़लक उट्ठै हीं
करते हैं उन को सज्दा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
आओ फकीरो आओ मुँह माँगी आस पाओ
बाब-ए-करीम है वा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
सूखी ज़बानों आओ ऐ जलती जानों आओ
लहरा रहा है दरिया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मुरझाई कलियों आओ कुम्हलाए फूलों आओ
बरसा करम का झाला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
तेरी चमक दमक से 'आलम चमक रहा है
मेरे भी बख़्त चमका सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
तारीक रात ग़म की लाई बला सितम की
सदक़ा तजल्लियों का सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
लाया है शेर तेरा नूर-ए-ख़ुदा का जल्वा
दिल कर दे दूध धोया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
बाँटा है दो-जहाँ में तू ने ज़िया का बाड़ा
दे दे 'हसन' का हिस्सा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.