Font by Mehr Nastaliq Web

ऐ हुब्ब-ए-वतन साथ न यूँ सू-ए-नजफ़ जा

हसन रज़ा बरेलवी

ऐ हुब्ब-ए-वतन साथ न यूँ सू-ए-नजफ़ जा

हसन रज़ा बरेलवी

MORE BYहसन रज़ा बरेलवी

    रोचक तथ्य

    منقبت در شان حضرت علی مرتضیٰ (نجف-عراق)

    हुब्ब-ए-वतन साथ यूँ सू-ए-नजफ़ जा

    हम और तरफ़ जाते हैं तू और तरफ़ जा

    चल हिन्द से चल हिन्द से चल हिन्द से ग़ाफ़िल

    उठ सू-ए-नजफ़ सू-ए-नजफ़ सू-ए-नजफ़ जा

    फँसता है वबालों में 'अबस अख़्तर-ए-ताले'

    सरकार से पाएगा शरफ़ बहर-ए-शरफ़ जा

    कुल्फ़त-ए-ग़म बंदा-ए-मौला से रख काम

    बे-फ़ाइदा होती है तिरी 'उम्र-ए-तलफ़ जा

    तल’अत-ए-शह तुझे मौला की क़सम

    ज़ुल्मत-ए-दिल जा तुझे उस रुख़ का हलफ़ जा

    क्यूँ ग़र्क़-ए-अलम है दुर-ए-मक़सूद से मुँह भर

    नैसान-ए-करम की तरफ़ तिश्ना-सदफ़ जा

    जीलाँ के शरफ़ हज़रत-ए-मौला के ख़लफ़ हैं

    ना-ख़लफ़ उठ जानिब-ए-ता’ज़ीम-ए-ख़लफ़ जा

    तफ़्ज़ील का जूया हो मौला के विला में

    यूँ छोड़ के गौहर को तू बहर-ए-ख़ज़फ़ जा

    कह दे कोई घेरा है बलाओं ने 'हसन' को

    शेर-ए-ख़ुदा बहर-ए-मदद तेग़-ब-कफ़ जा

    स्रोत :

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY
    बोलिए