आप की क्या आ'ला है शान या ख़्वाजा इसहाक़
रोचक तथ्य
منقبت در شان حضرت اسحاق مغربی (شیخ پورہ-بہار)
आप की क्या आ'ला है शान या ख़्वाजा इसहाक़
बच्चा-बच्चा है क़ुर्बान या ख़्वाजा इसहाक़
हम हैं गदागर भूल भी जाते हैं लेकिन
तुझ को हम सब का है ध्यान या ख़्वाजा इसहाक़
अहल-ए-सफ़ा से जगमग कर दिया जिस ने बहार
तेरे पीर का है ख़ानदान या ख़्वाजा इसहाक़
लाख मिसालें दे दे कर थक जाएँ लोग
रब ही जाने तेरी शान या ख़्वाजा इसहाक़
मग़रिबी लक़ब तुम्हारा तुम को ज़ेबा है
वतन तेरा मुल्क-ए-ईरान या ख़्वाजा इसहाक़
लौट के ख़ाली आप के दर से जाए कौन
जूद-ओ-सख़ा तेरी पहचान या ख़्वाजा इसहाक़
आख़िर तेरे दर पर ही जाते हैं ग़रीब
जारी है तेरा फ़ैज़ान या ख़्वाजा इसहाक़
तेरा वसीला सब को 'अता करता है ख़ुदा
माँगने वाले हैं हैरान या ख़्वाजा इसहाक़
कितने गुल सरकार के गुलशन के हैं यहाँ
तेरी हस्ती है बोस्तान या ख़्वाजा इसहाक़
'अमजद' भी अल्फ़ाज़ से करता है जादू
जब हो शे'र का तू 'उन्वान या ख़्वाजा इसहाक़
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