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मोरे पिया पर तन-मन वारूँ जो वारूँ सो थोरा रे

अब्दुल वारिस ख़ान

मोरे पिया पर तन-मन वारूँ जो वारूँ सो थोरा रे

अब्दुल वारिस ख़ान

MORE BYअब्दुल वारिस ख़ान

    रोचक तथ्य

    یہ شعر ’’مورے پیا پر تن من واروں جو واروں سو تھورا رے-ندیا کنارے مورلا بولے میں جانو پیا مورا رے‘‘ شاہ فضلِ رحمٰن گنج مرادآبادی کی زبانی اکثر گیا تھا، اسی لیے اس پر عبدالوارث خاں رحمانی نے چند مصرعے لگائے ہیں۔

    नैन रसीले मोहनी मूरत रंग पिया का गोरा रे

    मुखड़े से आँचल सरका के प्राण लियो है मोरा रे

    सीस चरण पर धर के पिया की बनती कर कर जोरा रे

    काया-माया सगरी लुटा कर करम धरम सब छोरा रे

    मोरे पिया पर तन-मन वारूँ जो वारूँ सो थोरा रे

    जिस को देखो 'इश्क़ है तेरा जो है तेरा शैदा है

    जिस को देखो नश्शा-ए-उल्फ़त से तेरे मतवाला है

    इंसान तो इंसान है प्यारे लेकिन क्या ये तमाशा है

    जान को अपनी कर के फ़िदा बुलबुल ये चमन में कहता है

    मोरे पिया पर तन-मन वारूँ जो वारूँ सो थोरा रे

    गब्र-ओ-मुसलमाँ सब हैं उस के दैर-ओ-हरम सब उस का है

    उस की वहदानियत की है मुझ को क़सम सब उस का है

    सर में सौदा है उस का दिल में भी ग़म सब उस का है

    दीन है उस का ईमान उस का तन-मन दम सब उस का है

    मोरे पिया पर तन-मन वारूँ जो वारूँ सो थोरा रे

    तेरी जुदाई में 'आशिक़ की पूछ कुछ जो हालत है

    दर्द-ए-जुदाई है और वोही जंगल है और वहशत है

    चाहत भी क्या चीज़ बुरी है पीली पड़ गई रंगत है

    और ज़बाँ पर हर दम जारी बस यही नग़्मा-ए-फ़ुर्क़त है

    मोरे पिया पर तन-मन वारूँ जो वारूँ सो थोरा रे

    पर्दा-नशीनी कैसी है ये कैसा घर-घर चर्चा है

    घूँगट कैसा पर्दा क्या सब जाए उसी का जल्वा है

    आए तो इक बार यहाँ वो फिर देखो क्या होता है

    जान-ओ-दिल ईमाँ के सिवा क्या पास हमारे रक्खा है

    मोरे पिया पर तन-मन वारूँ जो वारूँ सो थोरा रे

    अब हिज्र-ए-पिया में रातों को गिनते रहते हैं तारे

    तेरी अदा के ध्यान में हर दम चलते हैं दिल पर आरे

    कहते हैं ये तड़प-तड़प के 'आशिक़ तेरे बेचारे

    आँखों का सुख दिल की ठंडक मेरी जान मेरे प्यारे

    मोरे पिया पर तन-मन वारूँ जो वारूँ सो थोरा रे

    रिज़्क़ दिया ईमान दिया और अपनी उस ने चाहत दी

    बे-माँगे बे-मतलब मुझ को दोनों जहाँ की ने'मत दी

    इस पर वारिस लुत्फ़ ये है जो ने’मत दी बे-मिन्नत दी

    ऐसे सख़ी के क़ुर्बान जाऊँ जिसने मुझे ये दौलत दी

    मोरे पिया पर तन-मन वारूँ जो वारूँ सो थोरा रे

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