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उस की हर बात में यक-रंगी-ओ-यकताई है

अहसन मारहरवी

उस की हर बात में यक-रंगी-ओ-यकताई है

अहसन मारहरवी

MORE BYअहसन मारहरवी

    उस की हर बात में यक-रंगी-ओ-यकताई है

    इंतिहा ये कि बुराई में भी अच्छाई है

    जानते हैं हम उसे हम से शनासाई है

    'दाग़' हर चंद जहाँ गर्द है सौदाई है

    आप के सर की क़सम आप का सौदाई है

    कभी मस्जिद में दु'आ की कभी की ख़िदमत-ए-दैर

    मगर अफ़्सोस कहीं कुछ हुआ हासिल-ए-सैर

    हो गया ख़ूबी-ए-तक़दीर से शर बा’इस-ए-ख़ैर

    सूरत-ए-वस्ल थी कोई ब-जुज़ रंजिश-ए-ग़ैर

    वो जो बिगड़े हुए आए हैं तो बन आई है

    जानते हैं कि नहीं राहत-ए-जाँ रहमत-ए-’इश्क़

    फिर भी दिल से नहीं होती है जद्दा हसरत-ए-’इश्क़

    क्या बताए कोई अस्लियत-ओ-माहियत-ए-’इश्क़

    नहीं मा'लूम कि हैं कौन बला हज़रत-ए-'इश्क़

    यूँ तो अपनी भी ज़माने से शनासाई है

    सही 'अहद-ए-जवानी के जो दिन-रात नहीं

    'अहसन' इंसान है फ़रिश्ता नहीं जिन्नात नहीं

    ज़िक्र-ए-माज़ी हो अगर कुछ तो बुरी बात नहीं

    दाग़ को अब किसी गुल-रू से मुलाक़ात नहीं

    हम ने बरसों इसी गुलशन में हवा खाई है

    स्रोत :
    • पुस्तक : तज़्किरा-ए-शो’रा-ए-उत्तर प्रदेश हिस्सा अव्वल (पृष्ठ 37)
    • रचनाकार : इरफ़ान अ’ब्बासी
    • संस्करण : First

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