मकान-ए-बे-मकीं रा मन चरा जूयम चरा ख़्वाहम
रोचक तथ्य
منقبت درشان خواجہ عثمانی ہارونی (جنت المعلیٰ۔مکہ)
मकान-ए-बे-मकीं रा मन चरा जूयम चरा ख़्वाहम
निगाह-ए-का'बः-ओ-बुत-ख़ानः रा बे-पर्दः मी-बीनम
मुनव्वर शेनः-ए-ख़ुद रा ज़-नूर-ए-ज़ात मी-याबम
बे-हमदिल्लाह मक़्सूद-ए-हक़ीक़ी दर दिलम दारम
कि दारम चूँ तु यार-ए-ख़्वाजः-ए-’उस्मान-ए-हरूनी
ज़िया-ए-का'बः-ओ-बुत-ख़ानः रा दर क़ल्ब मी-याबम
रवान-ए-’इश्क़-ओ-रूह-ए-अंदर ख़्वेश्तन बीनम
मत’-दो-जहाँ दर दस्त-ए-ख़ुद वल्लाह मी-दारम
वगर चीज़े अज़ीं 'आलम वज़ाँ 'आलम चरा ख़्वाहम
कि दारम चूँ तु यारे ख़्वाजः-ए-'उस्मान-ए-हरूनी
अगर दुश्मन शवद मख़्लूक़ परवाए नमी दारम
ख़याल-ए-मर्दुमाँ गर मुंक़लिब गर्दद नमी तर्सम
अगर लश्कर कशद ग़म हेच ग़म ख़्वारे नमी ख़्वाहम
वगर बे-दस्त-ए-गर्दम मददगारे नमी जूयम
कि दारम चूँ तु यारे ख़्वाजः-ए-'उस्मान-ए-हरूनी
चराग़-ए-ख़ानः-ए-रब्बुल-’उला-ओ-नूर-ए-'आलम
ब-ज़ात-ए-ख़ुद निहाँ हर-दम ब-शान-ए-हक 'अयाँ पैहम
न-दारद हेच कस यारे चुनाँ यारे कि मन दारम
ब-शुक्र-ए-ईं करम पेश-ए-मु’ईनु्द्दीं हसन रक़्सम
कि दारम चूँ तु यारे ख़्वाजः-ए-'उस्मान-ए-हरूनी
मददगार-ओ-म’ईं-ओ-हामी-ए-अहल-ए-जहाँ दारम
पनाह-ए-बे-कसाँ-ओ-चारः-ए-बे-चारगाँ दारम
हबीब-ए-ख़ालिक़-ए-'आलम रफ़ीक़-ए-ख़ादिमाँ दारम
बे-हम्दिल्लाह-वल-मिन्नत शफ़ीक़-ए-बे-कराँ दारम
कि दारम चूँ तु यारे ख़्वाजः-ए-'उस्मान-ए-हरूनी
- पुस्तक : Moin-ul-Kul (पृष्ठ 123)
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