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बाग़-ए-अहमद के शजर आ जाइए

सय्यद हसन अहमद

बाग़-ए-अहमद के शजर आ जाइए

सय्यद हसन अहमद

MORE BYसय्यद हसन अहमद

    रोचक तथ्य

    عرضیِ امامِ زمانہ

    बाग़-ए-अहमद के शजर आ जाइए

    शेर-ए-यज़्दाँ के पिसर आ जाइए

    मुंतज़िर है ये ज़मीन-ओ-आसमाँ

    कह रहे हैं ये शजर आ जाइए

    है अँधेरा चार सौ छाया हुआ

    ले के नूरानी सहर आ जाइए

    शब को पुर-रौशन बनाने के लिए

    सेहन-ज़हरा के क़मर आ जाइए

    कह रहा है कब से का'बा बस यही

    खोल दूँ दीवार-ओ-दर आ जाइए

    ख़त्म करने मुंकिर-ए-हैदर को अब

    शेर-ए-हक़ के शेर-ए-नर आ जाइए

    अल-’अजल कहती हैं मख़्लूक़-ए-ख़ुदा

    ऐ इमाम-ए-बह्र-ओ-बर आ जाइए

    सय्यदा का वास्ता देते हैं हम

    हो दु'आएँ बा-असर आ जाइए

    तीरा का जल्वा है तुझ से ही 'अयाँ

    ऐ इमामत के समर आ जाइए

    नाम तेरा जप रहे हैं हर घड़ी

    ख़िज़्र-ओ-'ईसा रात-भर आ जाइए

    बाहर इमामत के सदफ़ से अब ज़रा

    ऐ इमामत के गौहर आ जाइए

    मुंतज़िर इक आप के दीदार को

    हैं हमारी चश्म-ए-तर आ जाइए

    इस से पहले हो न जाए ये कहीं

    ख़त्म साँसों का सफ़र आ जाइए

    'अर्ज़ियाँ यूँ कब तिलक डालेंगे हम

    अब ज़रा लेने ख़बर आ जाइए

    आप की ना'लैन पर ज़ैद-ओ-हसन

    चाहते हैं रखना सर आ जाइए

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