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چنین و چناں

مولانا رومی

چنین و چناں

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    INTERESTING FACT

    ترجمہ: )نیہ شبد نپور، بلرام شکل

    من از عالم تو را تنہا گزینم

    رواداری کہ من غمگیں نشینم

    सारी दुनियामें से मैंने केवल तुझ एक को चुना है।

    इस पर भी, क्या तुमको यह अच्छा लगेगा कि मैं दुःखी होकर बैठूँ?

    دل من چوں قلم اندر کف تست

    ز تست ار شادماں و گر حزینم

    मेरा दिल तुम्हारी हथेली में ऐसे ही है, जैसे लिखने वाले हाथ में क़लम,

    अगर मैं ख़ुश होऊँ या दुखी होऊँ सबमेंबस तुम्हींएक कारण हो।

    بجز آنچہ تو خواہی من چہ خواہم

    بجز آنچہ نمائی من چہ بینم

    जो चीज़ तुम नहीं चाहते, मैं उसे कैसे चाह सकता हूँ?

    जिस चीज़ को तुम दिखाओ, उसे मैं कैसे देख सकता हूँ?

    گہ از من خار رویانی گہے گل

    گہے گل بویم و گہ خار چینم

    कभी तो तुम मुझसे काँटे उगवाते हो औरकभी फूल खिलाते हो,

    लिहाज़ा, कभी मुझे फूल सूँघना होता है और कभी काँटा चुनना होता है।

    مرا گر تو چناں داری چنانم

    مرا گر تو چنیں خواہی چنینم

    मुझे अगर तुम वैसे रखो तो मैं वैसा रहूँगा,

    मुझे अगर तुमऐसे रखो तो मैं ऐसा रहूँगा।

    چو تو پنہاں شوی از اہل کفرم

    چو تو پیدا شوی از اہل دینم

    अगर तुम मुझसे छिप जाओ तो मैं काफ़िर हो जाता हूँ,

    अगर तुम मुझ पर प्रकट हो जाये तो मैं धार्मिक हो जाता हूँ।

    بجز چیزے کہ دادی من چہ دارم

    چہ می جویی ز جیب و آستینم

    तुमने जो चीज़ें मुझे दी हैं उनके अलावा मेरे पास और है हीक्या?

    आख़िर तुम मेरे जेब और आस्तीनों की तलाशी क्या ले रहे हो?

    مآخذ :
    • کتاب : نیہ شبد نپور (Pg. 122)
    • Author : مولانا رومی

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