नीस्त तन्हा ख़ल्क़ दर मद्ह-ओ-सनायत या-रसूल
नीस्त तन्हा ख़ल्क़ दर मद्ह-ओ-सनायत या-रसूल
मी-कुनद मद्ह-ओ-सनायत ख़ुद ख़ुदायत या-रसूल
या रसूलल्लाह! आपकी प्रशंसा में केवल इंसान ही नहीं हैं, बल्कि स्वयं अल्लाह भी आपके गुणों का बयान करने वाला है।
रहमत-ओ-ख़ुल्क़-ए-तु बा हर-कस-ओ-ना-कस यक-सर अस्त
मर्हबा सद-मर्हबा सद-मर्हबायत या-रसूल
आपकी दया और आपका सुंदर स्वभाव, योग्य और अयोग्य, सबके लिए समान है। या रसूलल्लाह! आपको बार-बार सलाम और बधाई।
यक-नज़र फ़र्मा कि हल्ल-ए-मुश्किलात-ए-मा शवद
बर दरत बाशम-ओ-हस्तम गदायत या-रसूल
हमारी मुश्किलों को दूर करने के लिए हम पर एक कृपा-दृष्टि कर दीजिए। या रसूलल्लाह! मैं आपके दर पर खड़ा हूँ और आपका ही याचक हूँ।
गो नियम मन लायक़-ए-तशरीफ़-ए-तू शाहा वले
दारम अज़ ज़ात-ए-तू उमीद-ए-'इनायत या-रसूल
ऐ बादशाह! अगर चे मैं इस योग्य नहीं कि आप स्वयं मेरे पास तशरीफ़ लाएँ, फिर भी या रसूलल्लाह! मुझे आपकी कृपा की आशा है।
ख़ान-ओ-मान-ओ-सब्र-ओ-जान-ओ-दीन-ओ-ईमान-ओ-दिलम
साज़-ओ-सामानम हमः बादा फ़िदायत या-रसूल
मेरा घर-बार, दिल और जान, धैर्य और शांति, मेरा दीन-ईमान और दुनिया का सारा सामान, सब कुछ आप पर क़ुर्बान हो, या रसूलल्लाह।
सायः-ए-ज़ुल्फ़त कि दारद बर सर-ए-ख़ुद 'नस्र'-ए-तू
ता-अबद मानद दरीं ज़िल्ल-ए-हिमायत या-रसूल
आपकी ज़ुल्फ़ का जो साया ‘नस्र’ के सर पर है (इशारा उस मुबारक बाल की ओर है जो ख़ानक़ाह-ए-मुजीबिया में सुरक्षित है), या रसूलल्लाह! उसकी बरकत और हिफ़ाज़त का साया हमेशा बना रहे।
- पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 232)
- रचनाकार :शाह हिलाल अहमद क़ादरी
- प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
- संस्करण : First
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