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सर पा-ए-तू या रसूलल्लाह

मुही फुलवारवी

सर पा-ए-तू या रसूलल्लाह

मुही फुलवारवी

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    सर पा-ए-तू या रसूलल्लाह

    दिल गदा-ए-तू या रसूलल्लाह

    मेरा सर आपके क़दमों पर है, रसूलुल्लाह!

    मेरी जान आप पर क़ुर्बान है, रसूलुल्लाह।

    दिलकश-ओ-दिलरुबा-ए-ख़ूबाँ अस्त

    हर अदा-ए-तू या रसूलल्लाह

    आपकी हर अदा बहुत प्यारी है, और आप तमाम हसीनों में दिलरुबा है रसूलुल्लाह! (यानी तमाम हसीनों से बढकर दिलरुबा है।

    दीदः-ओ-सीनः-ओ-दिल-ओ-रग-ए-जाँ

    हमः जा-ए-तू या रसूलल्लाह

    मेरी आँखों में, सीने में, दिल में और मेरी रग-रग में

    बस आप ही बसे हुए हैं, रसूलुल्लाह।

    बस गुज़ीदेम मन ज़-हर दोसरा

    यक सरा-ए-तू या रसूलल्लाह

    दुनिया और आख़िरत दोनों में मैंने सिर्फ़

    आपका ही सहारा अपनाया है, रसूलुल्लाह।

    मन चे-गोयम चूँ सना गोयद

    ख़ुद ख़ुदा-ए-तू या रसूलल्लाह

    मैं आपकी क्या तारीफ़ करूँ, रसूलुल्लाह!

    आपकी प्रशंसा तो ख़ुद अल्लाह करता है।

    जा-ए-ना'लैन हर दो-चश्मम बाद

    कफ़श-पा-ए-तू या रसूलल्लाह

    काश मेरी ये दोनों आँखें आपके

    क़दमों की जूती बन जातीं, रसूल अल्लाह।

    गिर्द-बादेम बस-कि सरगर्दां

    दर हवा-ए-तू या रसूलल्लाह

    मैं एक चक्रवात की तरह आपकी तलाश में

    (या आपकी फिज़ा में) घूमता रहूँ, रसूल अल्लाह।

    मी-देहद जान-ओ-ख़ान-ओ-मान 'मुही'

    ब-लिक़ा-ए-तू या रसूलल्लाह

    आपके दीदार के लिए ‘मुही’ अपनी जान,

    अपना माल और अपना घर सब कुछ निछावर कर रहा है, रसूलुल्लाह।

    स्रोत :
    • पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 290)
    • रचनाकार :शाह हिलाल अहमद क़ादरी
    • प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
    • संस्करण : First

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