Sufinama

पस ब-सूरत आलम-ए-असग़र तुई

रूमी

पस ब-सूरत आलम-ए-असग़र तुई

रूमी

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    पस ब-सूरत आलम-ए-असग़र तुई

    पस ब-मअ'नी आलम-ए-अकबर तुई

    वैसे तो देखने में छोटा संसार है परन्तु वास्तव में बहुत बड़ी दुनिया है।

    ज़ाहिरन आँ शाख़ अस्ल-ए-मेव: अस्त

    बातिनन बह्र-ए-समर शुद शाख़ हस्त

    प्रकट रूप में डाली से मेवा उत्पन्न है परन्तु वास्तव में मेवा फलने से पूर्व डाली निकलती है।

    गर न-बूदे मैल-ओ-उमीद-ए-समर

    कै निशाँदे बाग़बाँ बेख़-ए-शजर

    यदि फल की उत्कंठा और अभिलाषा होती तो माली वृक्ष का पौधा क्यों लगाता?

    पस ब-मअ'नी आँ शजर अज़ मेव:-ज़ाद

    गर ब-सूरत अज़ शजर बूदश निहाद

    वास्तव में पेड़ मेवे से उत्पन्न है, परन्तु प्रकट रूप से पेड़ से मेवा निकलता है।

    गर ब-सूरत मन ज़े-आदम-ज़ाद:-अम

    मन ब-मअ'नी जद्द-ए-जद उफ़्ताद:-अम

    प्रत्यक्ष में तो मैं मनुष्य से उत्पन्न हुआ हूँ परन्तु मैं वास्तव में दादा का दादा हूँ अर्थात् आदम से भी पूर्वज हूँ।

    पस ज़े-मन ज़ाईदः दर मा'नी पिदर

    पस ज़े-मेवः-ज़ाद दर मा'नी शजर

    और वास्तविकता का विश्वास रखते हुए पिता मेरी संतान है और उसी के अनुसार वृक्ष मेवे से उत्पन्न होता है।

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