Sufinama

ze-man chun dil rubudi raft jaan niz

Amir Khusrau

ze-man chun dil rubudi raft jaan niz

Amir Khusrau

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    INTERESTING FACT

    Translation: Amara Ali

    ze-man chuuñ dil rubūdī raft jaañ niiz

    ki dar dil dāsht shaukat īn-o-āñ niiz

    तुम ने मेरा दिल चुराया मेरी जान भी चली गई क्यूँ कि दिल के साथ हर क़िस्म का जज़्बा भी था.

    ze-yāqūt-e-labat tam.a-hāst

    kaz uu zindast jaañ va ham ravāñ niiz

    तुम्हारे होंठों के याक़ूत से हमें बहुत लालच है. क्युँकि उसी से जान और रूह सलामत है.

    raqībat ma-deh dushnām azaañ lab

    ki dil saḳht mī-āyad ravāñ niiz

    अपने रक़ीब को इन होंठों से गाली दो क्योंकि यह बात दिल को भी बुरी लगती है और रूह को भी.

    vale būdam shud aañ pāband-e-zulfat

    na mī-yābam az uu nām-o-nishāñ niiz

    मेरे पास एक दिल था और वह तेरी ज़ुल्फ़ों का असीर हो गया अब उसका कहीन नाम-ओ-निशान बाक़ी नहीं है.

    ta.ālallāh che tañg ast aañ dahānat

    ki fikr aañ namī gunjad gumāñ niiz

    ख़ुदा की क़सम तेरा मुँह कितना तंग है कि उस में सोच समा सकती है और वहम-ओ-गुमान

    ġhamat 'ḳhusrav' che goyad āshkārā

    ki nā-tavāñ guft rāz-e-naunihāñ niiz

    ‘ख़ुसरौ’ तुम्हारा ग़म खुल कर क्या बयान करे तुम्हारे राज़ तो ढके-छुपे अंदाज़ में बयान नहीं किया जा सकता.

    ze-man chun dil rubudi raft jaan niz

    ki dar dil dasht shaukat in-o-an niz

    तुम ने मेरा दिल चुराया मेरी जान भी चली गई क्यूँ कि दिल के साथ हर क़िस्म का जज़्बा भी था.

    ze-yaqut-e-labat ma ra tama-hast

    kaz u zindast jaan wa hum rawan niz

    तुम्हारे होंठों के याक़ूत से हमें बहुत लालच है. क्युँकि उसी से जान और रूह सलामत है.

    raqibat ra ma-deh dushnam azan lab

    ki dil ra saKHt mi-ayad rawan niz

    अपने रक़ीब को इन होंठों से गाली दो क्योंकि यह बात दिल को भी बुरी लगती है और रूह को भी.

    wale budam shud aan paband-e-zulfat

    na mi-yabam az u nam-o-nishan niz

    मेरे पास एक दिल था और वह तेरी ज़ुल्फ़ों का असीर हो गया अब उसका कहीन नाम-ओ-निशान बाक़ी नहीं है.

    taalallah che tang ast aan dahanat

    ki fikr aan ja nami gunjad guman niz

    ख़ुदा की क़सम तेरा मुँह कितना तंग है कि उस में सोच समा सकती है और वहम-ओ-गुमान

    ghamat 'KHusraw' che goyad aashkara

    ki na-tawan guft raaz-e-naunihan niz

    ‘ख़ुसरौ’ तुम्हारा ग़म खुल कर क्या बयान करे तुम्हारे राज़ तो ढके-छुपे अंदाज़ में बयान नहीं किया जा सकता.

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