Sufinama
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Ratankuvari Bai

भये मगन सब प्रेम रस, भूलि गए निज देह

लघु दीरघ वै नारि नर, सुमिरत श्याम-सनेह ।।

बरन बरन बर तंबुवन, दीन्हो तान वितान

अति फूले फूले फिरत, डेरा परत जान ।।

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