सूफ़िया-ए-किराम की अरवाह विसाल के दिन अपनी क़ब्रों की तरफ़ मुतवज्जेह होती है, चुनाँचे उन के विसाल का मख़्सूस वक़्त रूहानी फ़ैज़ हासिल करने के लिए सब से मौज़ूँ होता है।
सूफ़िया-ए-किराम की अरवाह विसाल के दिन अपनी क़ब्रों की तरफ़ मुतवज्जेह होती है, चुनाँचे उन के विसाल का मख़्सूस वक़्त रूहानी फ़ैज़ हासिल करने के लिए सब से मौज़ूँ होता है।
अहमद रज़ा ख़ान
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सूफ़िया-ए-किराम की अरवाह विसाल के दिन अपनी क़ब्रों की तरफ़ मुतवज्जेह होती है, चुनाँचे उन के विसाल का मख़्सूस वक़्त रूहानी फ़ैज़ हासिल करने के लिए सब से मौज़ूँ होता है।
- पुस्तक : The Sayings and Teachings of the Great Mystics of Islam
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